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Shiv Temple In Kanpur: महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास, सावन में आप भी करें दर्शन

Mon, 29 Jul 2024 09:53 AM IST
श्रुति गौड़ लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सावन का महीना चल रहा है। ऐसे में अगर आप कानपुर में रहते हैं तो सदियों पुराने आनंदेश्वर मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन करने अवश्य जाएं। 
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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
Shiv Temple In Kanpur: सावन का महीना हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने लोग भोलेनाथ की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं और शिव-शंकर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। खासतौर पर अगर बात करें सावन के सोमवार की तो इस दिन बहुत से लोग महादेव के दर्शन करने शिवालय भी जाते हैं। ऐसे में हम आपको आज एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। 

 महादेव का ये प्राचीन मंदिर देशभर में भक्तों की आस्था का केंद्र है। लोग मीलों दूर से इस मंदिर में महादेव के दर्शन करने आते हैं। बड़ी बात ये है कि मंदिर को छूकर वहां गंगा नदी निकलती है। हम बात कर रहे हैं कानपुर के बाबा आनंदेश्वर मंदिर की, जिसे परमट के नाम से भी जाना जाता है। सावन के सोमवार के दिन इस मंदिर में शिव भक्त कांवड़ लेकर भी पहुंचते हैं। लोगों के बीच इस मंदिर की काफी मान्यता है, आइए आपको इसके बारे में बताते हैं। 
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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास

बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं हैं कि कानपुर के परमट मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में दानवीर कर्ण पूजा करने आते थे। इस मंदिर के पास से ही गंगा नदी भी बहती है, ऐसे में वो सबसे पहले गंगा नदी में स्नान करते थे, और उसके बाद ही महादेव की पूजा करते थे।
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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
खास बात ये थी कि सिर्फ कर्ण को ही इस शिवलिंग के बारे में पता था। कर्ण गंगा में स्नान करने के बाद गुपचुप तरीके से महादेव की पूजा करते थे और उसके बाद विलुप्त हो जाते थे।

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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
एक दिन आनंदी नाम की गाय ने उन्हें यहां पूजा करते देख लिया। उसके बाद से आनंदी गाय हर रोज आकर अपना सारा दूध वहीं छोड़ देती थी। जब उस स्थान की ग्रामीणों द्वारा खुदाई की गई तब वहां से यह शिवलिंग निकला, जिसके बाद उसी स्थान पर शिवलिंग को स्थापित किया गया। शिवलिंग मिलने के बाद उस गाय ने भी वहां अपना दूध बहाना बंद कर दिया। इसी वजह से इस मंदिर का नाम आनंदेश्वर पड़ गया। 
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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
दर्शन से पूरी होती है हर मनोकामना 

पहले ये मंदिर एक टीले पर स्थापित था, लेकिन अब तो ये मंदिर काफी ज्यादा भव्य बन गया है। यहां शिवलिंग के साथ विह्नहर्ता गणपति महाराज, संकटमोचन हनुमान जी, श्रीहरि विष्णु भगवान और समस्त देवी-देवताओं की प्रतिमाएं विराजमान हैं। 
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महाभारत काल से जुड़ा है कानपुर के इस शिव मंदिर का इतिहास - फोटो : instagram-anandeshwar_baba
मान्यता है कि सावन में आनंदेश्वर बाबा के दर्शन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बाबा गंगा जल और बेल पत्र अर्पित करने से खुश होते हैं। ऐसे में लोग काफी दूर-दूर से बाबा के दर्शन करने कानपुर के परमट मंदिर आते हैं। 
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