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Dussehra 2022: भारत के इन मंदिरों में होती है रावण की पूजा, दशहरा के दिन लोग मनाते हैं शोक

Wed, 05 Oct 2022 07:39 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रावण के मंदिर - फोटो : istock
Dussehra 2022:  इस साल 5 अक्टूबर 2022 को देशभर में दशहरा का पर्व मनाया जा रहा है। दशहरा के दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे, जिनका जन्म अधर्म, असत्य और पाप का अंत करने के लिए हुआ था। रावण लंका के राजा तो थे ही, साथ ही वह भगवान भोलेनाथ के परम भक्त थे और रावण को महाज्ञानी भी कहा जाता है। सीता का हरण करने के बाद दस सिरों वाला यह विद्वानी राक्षस कहलाया जाने लगा। दशहरा के दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है और अधर्म व असत्य की हार को प्रदर्शित किया जाता है। लेकिन भारत में ही ऐसे कई मंदिर हैं, जहां दशानन यानी रावण की पूजा होती है। इस विजयदशमी के मौके पर देश में स्थिर रावण के मंदिरों के बारे में जानें, जहां दशहरा के दिन रहता है शोक का माहौल।
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रावण का मंदिर - फोटो : facebook
कर्नाटक का लंकेश्वर महोत्सव

कर्नाटक के कोलार जिले में लंकेश्वर महोत्सव का आयोजन होता है। इस महोत्सव में रावण की पूजा होती है और जुलूस निकाला जाता है। लंका के राजा रावण के साथ ही भगवान शिव की प्रतिमा भी जुलूस में निकाली जाती है। शिवजी के भक्त होने के कारण रावण की यहां पूजा होती है। इसके अलावा कोलार के मालवल्ली तहसील में ही रावण का एक मंदिर भी बना हुआ है।
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विदिशा मे रावण का मंदिर - फोटो : facebook
मध्य प्रदेश का विदिशा

लंका के रावण की पत्नी मंदोदरी का जन्म मध्य प्रदेश के विदिशा में हुआ था। इस जगह को रावण की ससुराल माना जाता है और यहां उनकी पूजा होती है। विदिशा में रावण की 10 फीट लंबी प्रतिमा बनी हुई है। दशहरे के दिन यहां रावण की पूजा की जाती है। शादी या अन्य किसी शुभ कार्य में लोग विदिशा में स्थित रावण की मूर्ति की पूजा करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

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मंदसौर में रावण का मंदिर - फोटो : facebook
मध्य प्रदेश का मंदसौर

भारत का रावण का सबसे पहला मंदिर मध्य प्रदेश में बना था। यहां मंदसौर में रावण की रुण्डी नाम की विशाल प्रतिमा रखी हुई है, जिसकी लोग पूजा करते हैं। रावण की मूर्ति के सामने महिलाएं घूंघट डालकर जाती हैं। मान्यता है कि मंदसौर मंदोदरी का मायका है, इसलिए रावण मंदसौर के दामाद हैं।
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बैजनाथ कस्बे में रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है। - फोटो : istock
हिमाचल प्रदेश का बैजनाथ कस्बा

हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ कस्बा में भी रावण की पूजा होती है, हालांकि यहां रावण का कोई मंदिर नहीं है। मान्यता है कि बैजनाथ कस्बा में रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। इसलिए लोग रावण की यहां पूजा करते हैं और दशहरा में रावण का पुतला नहीं जलाते।
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कानपुर दशानन मंदिर - फोटो : facebook
उत्तर प्रदेश के कानपुर में दशानन मंदिर

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में भी रावण का मंदिर है, जो साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है। कानपुर के शिवाला क्षेत्र में मौजूद इस मंदिर का नाम दशानन मंदिर है, जिसे दशहरा के दिन खोला जाता है। इस दिन मंदिर में स्थापित रावण की मूर्ति का श्रृंगार करके पूजा और आरती की जाती है।  मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यहां तेल का दीया जलाकर मन्नत मांगने पर मनोकामना पूरी होती है। 
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