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Coorg hills: एडवेंचर के साथ प्रकृति की खूबसूरती का खजाना

Thu, 02 Feb 2023 11:28 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खूबसूरती से भरपूर कुर्ग का पहाड़ी इलाका - फोटो : iStock
पहाड़ों की सैर केवल मन को तरोताजा ही नहीं करती बल्कि इसकी वजह से शरीर को भी बहुत फायदा होता है। साफ़, ताज़ी हवा फेफड़ों को शक्ति देती है और साथ ही लम्बी दूरियों तक पैदल चलने से पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है। यही कारण है कि अक्सर मन की शांति और शरीर के स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर भी पहाड़ों पर जाने की सलाह देते हैं। दूर दूर तक फैली हरियाली, पंछियों की मधुर आवाज़ और मन को ख़ुशी देती हवा के झोंके, सबकुछ मिलकर एक अद्भुत वातावरण की रचना कर डालते हैं। ऐसा ही जादुई माहौल रचते हैं भारत के दक्षिणी हिस्से में मौजूद कुर्ग और उसके आस पास के पहाड़। यहाँ आप जंगल, पहाड़, नदियों, झरनों जैसे हर प्राकृतिक नजारे का आनंद उठा सकते हैं। साथ ही प्रकृति के बीच रहकर अद्भुत वातावरण से मित्रता भी कर सकते हैं। कुर्ग के ज्यादातर इलाके सुरक्षित और सुविधायुक्त हैं, लिहाजा आप परिवार के साथ भी इन पहाड़ियों की सैर निश्चिन्त होकर कर सकते हैं। इन पहाड़ियों पर हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं। 
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कुर्ग का खूबसूरत नजारा - फोटो : Facebook/coorg
ये पहाड़ियां हैं खास 

वैसे तो कुर्ग का पूरा इलाका ही खूबसूरत है लेकिन अगर आप ट्रैंकिंग और एडवेंचर दोनों पसंद करते हैं तो खासकर यहाँ की कुछ पहाड़ियां आपके लिए बढ़िया विकल्प हो सकती हैं। ये पहाड़ियां कुर्ग की यात्रा को और भी अच्छा बना सकती हैं। यहां ट्रैकिंग से लेकर बर्ड वॉचिंग, वाइल्ड लाइफ और हरे भरे जंगलों में झरनों के रूप में बहती प्रकृति के बीच बहुत आनंद से समय बिताया जा सकता है। कुर्ग की वादियों के साथ मौजूद ऐसी कुछ पहाड़ियों में शामिल हैं-
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बिखरी मिलेगी यहाँ कॉफी भी
तड़ीअंडमोल

कर्नाटक क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी में से एक के रूप में पहचान प्राप्त इस पहाड़ी पर घने जंगल और ताज़ी हवा दोनों भरपूर हैं। यह करीब 5,700 फ़ीट की ऊंचाई पर है, इसलिए ट्रैकिंग के लिए अच्छा ख़ासा लम्बा रास्ता तय किया जा सकता है। रास्ते में जगह जगह झरने और कॉफी, काली मिर्च के पौधे भी आपका स्वागत करेंगे। ऊंचाई पर होने की वजह से यहाँ से आस पास का नजारा और भी खूबसूरत बन जाता है और यही कारण है कि यहाँ लोग फोटोग्राफी के लिए भी बड़ी संख्या में आते हैं। 
 

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झरने और नदियां यहाँ आम हैं - फोटो : Facebook/coorg
पुष्पगिरी

खासतौर पर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए प्रसिद्ध यह पहाड़ी अपनी सुंदरता से सबका मन मोह लेती है। यहाँ कई तरह के पंछी मौजूद होते हैं, लिहाजा यह बर्ड वॉचिंग के लिए एक शानदार विकल्प है। यहाँ के कुमारा पर्वत से दिखाई देने वाला नजारा सबसे मनमोहक है। इसकी चोटी से निकलती नदी और हरे भरे जंगल हाइकिंग के शौकीनों के लिए दावत की तरह हैं। यही कारण है कि न केवल आस पास के बल्कि देश-विदेश के कई हिस्सों से लोग यहाँ ट्रैकिंग के लिए आते हैं।  
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हाथियों के झुण्ड दिखाई देंगे कुर्ग में - फोटो : पेक्सेल्स
ब्रह्मगिरि 

नदी में अठखेली करते हाथियों के झुण्ड और खूबसूरत पक्षी इस रास्ते में आपको रूककर साथ समय बिताने पर मजबूर करेंगे। यह भी एक वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है और अगर भाग्य ने आपका साथ दिया तो यहाँ अन्य बड़े जानवर भी आसानी से रास्ते में घूमते दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा घने पेड़ों से भरे जंगल और हरियाली से भरपूर मैदान तो हैं ही। रास्ते में पड़ेंगे कई छोटे छोटे झरने और इस स्थान का खास आकर्षण थिरुनेलाई मंदिर और इरुप्पु फॉल्स भी। साथ में स्थित पक्षिपातालम में मौजूद गुफाएं रहस्य और इतिहास दोनों की आकर्षक तस्वीर आपके सामने प्रस्तुत करेंगी।  
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पहाड़ पर कैम्पिंग की सुविधा भी उपलब्ध होती है - फोटो : istock
जाने का समय और खर्च 

कुर्ग की यात्रा अक्टूबर से अप्रैल तक की जा सकती है। चूँकि यह जगह हरियाली, पानी, पहाड़ और जंगलों से भरपूर है इसलिए गर्मी की छुट्टियों का यहाँ खास आनंद उठाया जा सकता है। ज्यादातर जगह आपको रुकने के लिए अच्छे कॉटेज और होटल्स मिल जायेंगे जो बजट से लेकर लक्ज़री अकोमोडेशन तक मुहैया करवाते हैं। इनके लिए 2,500-7,000 तक का टैरिफ चुकाना होता है। यदि ट्रैकिंग के लिए जा रहे हैं तो हर पहाड़ी के बेस में कैम्प के साथ बाकी जरूरी सुविधाएँ भी मौजूद होती हैं, जिनके लिए सुविधाओं के लिए हिसाब से दाम चुकाना पड़ते हैं। यह 4 हजार से 6 हजार प्रति व्यक्ति तक हो सकता है। टेंट से लेकर ट्रैकिंग के अन्य सामान और खाने-पीने की व्यवस्था भी इसके अंतर्गत आ सकती है। अधिकांशतः आपको सिर्फ एक बैग और स्लीपिंग बैग लेकर चलने को कहा जाता है। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के लिए एंट्री फीस भी सभी जगह अलग होती है। पहाड़ियों की चोटी तक पहुंचकर वापस नीचे आने का सफर आप चाहें तो एक दिन में भी पूरा कर सकते हैं और चाहें तो ऊपर रुकने का विकल्प भी चुन सकते हैं।  
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कुर्ग में सड़क मार्ग है सुविधाजनक
कैसे पहुंचें 

कर्नाटक के इस हिस्से तक पहुंचने के लिए पहले बैंगलोर (करीब 250 किलोमीटर) , मैसूर (लगभग 120 किलोमीटर) या मैंगलोर (करीब 140 किलोमीटर) तक पहुंचना जरूरी है। यहाँ से आप कर्नाटक राज्य शासन द्वारा चलने वाली बसें, प्राइवेट बस या टैक्सी या अन्य वाहन द्वारा कुर्ग पहुंच सकते हैं। इसमें करीब 4-5 घंटे का समय लग सकता है। कुर्ग पहुंचने के बाद हर पहाड़ी के लिए ट्रैकिंग का पहुंच मार्ग अलग अलग होगा जिसके लिए आपको वाहन तय करना होगा। 
 
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