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अजमेर घूमने जाने का है प्लान, तो इन जगहों पर जाना बिल्कुल न भूलें

Tue, 16 Feb 2021 03:35 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अजमेर का खूबसूरत नजारा - फोटो : iStock
अजमेर राजस्थान का एक एतिहासिक शहर है, जो अरावली पर्वत श्रेणी की तारागढ़ पहाड़ी की ढाल पर स्थित है। इस शहर को सातवीं शताब्दी में अजयराज सिंह नामक एक चौहान राजा द्वारा बसाया गया था। पहले अजमेर को 'अजयमेरु' नाम से जाना जाता था। कहते हैं कि चौहान वंश ने ही तारागढ़ किले का निर्माण करवाया था, जिसे 'भारत का पहला पहाड़ी किला' कहा जाता है। आज अजमेर देश का एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है, जहां सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग घूमने के लिए आते हैं। आइए जानते हैं यहां घूमने लायक कौन-कौन सी जगहें हैं...
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अजमेर शरीफ - फोटो : Facebook/Saqib Iqbal
अजमेर शरीफ 
  • अजमेर में स्थित मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस दरगाह में हर धर्म-समुदाय के लोग मत्था टेकने के लिए आते हैं। यहां आकर लोग मन्नत मांगते हैं और वो पूरी हो जाने पर यहां आकर लोग दरगाह पर चादर चढ़ाते हैं। 
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पुष्कर झील - फोटो : Facebook/Pushkar
पुष्कर 
  • अगर आप अजमेर गए और पुष्कर नहीं घूमे तो मतलब आपने कुछ नहीं घूमा। यह राजस्थान का एक विख्यात तीर्थ स्थान है, जहां ब्रह्मा जी का मंदिर है। कहते हैं कि पूरे देश में यह ब्रह्माजी का इकलौता मंदिर है। इसके अलावा पुष्कर झील भी देशभर में मशहूर है। इसे भारत के पांच पवित्र सरोवरों में से एक माना जाता है। यह अजमेर शहर से14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 

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तारागढ़ किला - फोटो : Facebook/Fabulous Rajasthan
तारागढ़ किला 
  • यह किला अरावली पर्वत पर स्थित है। यह अजमेर के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक है। पहाड़ी की खड़ी ढलान पर बने इस किले में प्रवेश करने के लिए तीन विशाल द्वार बनाए गए हैं। यह किला पर्यटकों के लिए वास्तुकला का एक शानदार और उत्कृष्ट उदाहरण पेश करता है। घूमने के लिहाज से यह एक बेहतरीन जगह है। 
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अढ़ाई दिन का झोपड़ा - फोटो : iStock
अढ़ाई दिन का झोपड़ा 
  • यह एक मस्जिद है, जो भारत की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक और अजमेर का सबसे पुराना स्मारक है। इसे वर्ष 1192 में अफगान सेनापति मोहम्मद गोरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया था। हालांकि कहा जाता है कि इस जगह पर एक बहुत बड़ा संस्कृत विद्यालय (स्कूल) और मंदिर था, जिन्हें तोड़कर मस्जिद में बदल दिया गया था। यही वजह है कि यह अंदर से एक मस्जिद की तरह न लगकर, किसी मंदिर की तरह दिखाई देता है। हर साल यहां हजारों लोग घूमने के लिए आते हैं। 
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