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समाज इतना असहज क्यों
खैर, ब्रा को आज महिलाओं के कपड़ों का अनिवार्य हिस्सा बना दिया गया है। हां, ये जरूर है कि ब्रा के विरोध में अब दबी-दबी ही सही आवाजें सुनाई देने लगी हैं। लेकिन ब्रा के विरोध होने या न होने से बड़ा सवाल ये है कि इसे लेकर समाज इतना असहज क्यों है?
ब्रा के रंग से परेशानी, ब्रा के दिखने से परेशानी, ब्रा के खुले में सुखने से परेशानी और ब्रा शब्द तक से परेशानी। औरत के शरीर और उसके कपड़ों को इस तरह कंट्रोल किए जाने की कोशिश आखिर क्यों? शर्ट, पैंट और बनियान की तरह ब्रा भी एक कपड़ा है। बेहतर होगा कि हम इसे भी एक कपड़े की तरह ही देखें।