बच्चों की फोन एक्टिविटी समय-समय पर चेक करते रहना भी जरूरी है
- बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी की निगरानी जरूरी
बॉयज लॉकर रूम जैसी घटना पर डॉ. शिवानी कहती हैं कि इसके लिए केवल बच्चों को दोषी ठहराने की बजाय हमें सारे पहलुओं पर सोचना होगा। कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल और इंटरनेट पर बच्चे कितना समय बिताते हैं, क्या-क्या देखते हैं, इसकी पहरेदारी करना मुश्किल है। ऐसे में डॉ. शिवानी कुछ सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन की जरूरत बताती हैं। पैरेंट्स कंट्रोल डिवाइस एप, फैमिली जोन एप्लिकेशन, ओपन स्मार्टफोन एक्सेस पर पाबंदी वाले अन्य एप सहायक हो सकते हैं। साथ ही बच्चों की फोन एक्टिविटी समय-समय पर चेक करते रहना भी जरूरी है। किशोरावस्था में बच्चों के भटकाव की संभावना रहती है और इससे बचने के लिए डॉ. शिवानी बच्चों से संवाद को सबसे जरूरी बताती हैं।
(नोट: तस्वीरें प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल की गई हैं।)