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Toxic Friendship: दोस्ती में जहर की तरह होती हैं ये बातें, संकेत पहचानकर संभाल लें रिश्ता

Tue, 22 Aug 2023 11:56 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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दोस्त - फोटो : Istock
प्रज्ञा तिवारी
 
Toxic Friendship :
कहते हैं, सच्चा दोस्त हर मर्ज की दवा होता है, लेकिन दवा भी अगर सीमा से ज्यादा ली जाए तो जहर बन जाती है। जानकार इसे ‘टॉक्सिक दोस्ती’ कहते हैं। कविता और शुभि की दोस्ती की मिसाल पूरा कॉलेज दिया करता था। एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थीं दोनों। लेकिन धीरे-धीरे शुभि ने कविता पर मालिकाना हक जताना शुरू कर दिया। कॉलेज से लेकर कविता की निजी जिंदगी में भी शुभि हर बात में हस्तक्षेप करने लगी। मामला यहां तक पहुंच गया कि कविता तनाव में रहने लगी और देखते-देखते मिठास भरे रिश्ते में कीड़े पड़ गए। हर किसी की जिंदगी में शुभि जैसी दोस्त आती है या आ सकती हैं। मनोविज्ञान की भाषा में इसे ‘टॉक्सिक दोस्ती’ कहा जाता है। लेकिन कैसे पता चले कि दोस्ती टॉक्सिक हो चुकी है और अगर हो गई है तो इस से बाहर निकलने का क्या तरीका है।
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friendship - फोटो : istock
टॉक्सिक दोस्ती की पहचान
  • जब आपके जीवन की शांति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दोस्त की वजह से भंग होने लगे।
  • जब मन में दोस्त के लिए प्यार से ज्यादा डर सताए और आपका ज्यादातर वक्त उसको मनाने में बीतने लगे।
  • जब दोस्त आपको धोखा दे रहा हो या आपका इस्तेमाल कर रहा हो।
  • जब अपने हर छोटे से छोटे काम के लिए दोस्त पर निर्भर होना पड़े और आपका आत्मविश्वास खत्म होने लगे।
  • मन की बातें दोस्त से कहने की हिम्मत न हो।
  • दोस्त सहभागी न होकर मालिक बनने लगे।
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friendship - फोटो : istock
हल क्या है

किसी भी चीज की अति से बचें, फिर चाहे वह प्यार हो, केयर हो या नाराजगी। ऐसी दोस्ती दमघोंटू होती है। इनमें से किसी की भी अति हो तो समझ जाएं कि रिश्ता खत्म होने को है। ऐसे में धीरे-धीरे पीछे हटें। दोस्ती खत्म करने में थोड़ी समझदारी दिखाएं। लड़ाई-झगड़ा करके रिश्ता खत्म करने से अच्छा है कि धीरे-धीरे अपने कदम पीछे खींच लें। सामने वाला भी आपके रूखे व्यवहार को समझ जाएगा और आपकी मानसिक शांति भी बनी रहेगी। इसके साथ ही दृढ़ बनें।

अगर आप टॉक्सिक दोस्ती से बाहर निकलना चाह रही हैं तो दिल को थोड़ा मजबूत रखना होगा, क्योंकि हो सकता है कि सामने वाले को एक बार माफ करके आप सब सामान्य करने की कोशिश करें, लेकिन जब यह बार-बार हो तो फिर आप ऐसे में खुद को कंट्रोल करें। संपर्क के सारे रास्ते खुद ही बंद करें।

अगर समस्या ज्यादा बढ़ गई हो तो परिवार वालों की मदद लें। अगर आपका दोस्त आपको धोखा दे रहा हो और नजरअंदाज कर रहा हो तो समझ जाएं कि दोस्ती सिर्फ नाम की बची है। ऐसे रिश्ते को बेवजह ढोने की कोशिश न करें, क्योंकि यह आपको भावनात्मक रूप से कमजोर करेगा।

इसके अलावा कई बार गलतफहमियों या छोटी-मोटी भूल की वजह से भी दोस्ती में दरार पड़ जाती है। दोस्ती में एक-दूसरे पर भरोसा करना आना चाहिए। खुद भी इस काबिल बनें कि आप पर भरोसा किया जा सके, ताकि किसी तीसरे के लिए जगह न बचे। गलतफहमियों से दूरी बनाए रखें।
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friendship - फोटो : istock
गुण के साथ कमी भी स्वीकारें

बरेली कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुविधा शर्मा कहती हैं, दोस्ती में एक-दूसरे के प्रति स्वीकार्यता का भाव होना चाहिए। गुण के साथ कमियों को भी स्वीकारें, क्योंकि संपूर्ण कोई भी नहीं है। दोस्ती टॉक्सिक होने लगे तो पॉजिटिव एटीट्यूड के साथ आपस में बात करें। संवादहीनता न आने दें। छोटी-छोटी बातों को अनदेखा करना सीखेंगी तो दोस्ती लंबी चलेगी। दोस्त से अपेक्षा कम रखें और मालिकाना हक न जताएं। उसके निर्णयों के प्रति सम्मान रखें। एक-दूसरे के पर्सनल स्पेस में बिल्कुल न जाएं। इसके बावजूद रिश्ता टॉक्सिन होने लगे तो बिना आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तुरंत पीछे हट जाएं।
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