फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Raksha Bandhan 2022: भाई-बहन को ऐसे सिखाएं एक-दूसरे का सम्मान करना, डालें ये 5 आदतें

Wed, 10 Aug 2022 03:35 PM IST
स्वाति शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
सम्मान की भावना से भरा रिश्ता - फोटो : amar ujala
भाई-बहन के बीच का रिश्ता सबसे अनमोल होता है। इस रिश्ते में एक-दूसरे के लिए प्रेम और स्नेह के साथ सम्मान की भावना का होना भी जरूरी होता है। कई बार परिवारों में जाने-अनजाने ऐसा माहौल बन जाता है कि या तो भाई अपनी छोटी या बड़ी बहन को कमतर मानने लगता है या फिर बहन, भाई को सम्मान देने की बजाय दूसरों के सामने भी उसको बेइज्जत करने लगती है। इस स्थिति में यह खूबसूरत सा रिश्ता कड़वाहट से भरने लगता है। चाहे एक-दूसरे को सम्बोधित करने की बात हो, किसी काम में सहायता करने की या सामान्य रोजमर्रा के जीवन की, यदि भाई-बहन एक दूसरे के लिए सम्मान की भावना नहीं रखते तो वे एक-दूसरे का महत्व भी उतनी गंभीरता से नहीं समझ पाते। इसलिए जरूरी है कि भाई-बहनों में कुछ आदतें बचपन से डाली जाएं। इन आदतों को अपनाकर वे न केवल इस रिश्ते का सम्मान बढ़ाएंगे बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे। जानिए ऐसी ही 5 बातों को जो आपके बच्चों के मन में उनके भाई-बहनों के लिए सम्मान की भावना का विकास करेंगी। 
विज्ञापन

2 of 6
भाई बहन का रिश्ता सबसे अनमोल - फोटो : pixabay
दीदी या भैया बोलने की आदत डालें

बच्चे हमेशा बड़ों की नकल करते हैं। ऐसा कई घरों में होता है कि जो सम्बोधन घर के बड़े, बच्चों के लिए उपयोग में लाते हैं, वही उन बच्चों के छोटे भाई या बहन भी लाने लगते हैं। उदाहरण के लिये किसी घर में उस घर की बड़ी बेटी को नाम से बुलाया जाता है तो उस बेटी का छोटा भाई भी उसे नाम से बुलाने लगता है और यह उसकी आदत में आ जाता है। छुटपन में तो यह क्यूट लगता है लेकिन बड़े होने पर कई बार अखरता है। वह भी तब, जब भाई या बहन उम्र में अधिक बड़े हों। इसलिए यदि घर के छोटे बच्चे को बड़े भाई या बहन को दीदी या भैया कहना सिखाना है तो कोशिश करें कि उसके सामने घर के बाकी बड़े भी जहां तक हो सके यही सम्बोधन रखें। 
विज्ञापन

3 of 6
तुलना का बीज पैदा करता है मनमुटाव - फोटो : iStock
तुलना से बचने की आदत डालें 

घर में अगर दो बच्चे हैं तो उनमें तुलना करना घातक भी साबित हो सकती है। रंग-रूप, पढ़ाई, खेल किसी भी तरह की तुलना गलत है। हर बच्चा अलग होता है और यह बात बड़ों को समझनी चाहिए। तुलना, बचपन से ही व्यक्ति के मन में हीनभावना, कुंठा, निराशा और गुस्से जैसी भावनाओं का प्रतिशत बढ़ा सकती है। इससे भाई-बहन के बीच का रिश्ता तो बिगड़ता ही है, बड़े होने पर भी वे कई बार मन में एक-दूसरे के प्रति बैर पाले रह सकते हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि दो भाई या बहन जब एक ही स्कूल में पढ़ते हैं तो टीचर्स ही उनके बीच तुलना करने लगते हैं। इससे बच्चों के मन में भी खुद के सुपीरियर होने का भाव आ जाता है और वह तुलना उन्हें अच्छी भी लगने लगती है। बच्चों को एक-दूसरे की खूबियों के बारे में बताएं और उन्हें समझाएं कि वे अपने गुणों के विकास पर ध्यान दें। उन्हें एक-दूसरे से अच्छी बातें सीखने को प्रेरित करें। कम से कम परिवार में उन्हें इस अनचाही स्थिति से उबरने का माहौल दें। चाहे घर में हो या रिश्तेदारी में, कभी भी भाई-बहनों के बीच तुलना का बैर न आने दें। 

4 of 6
भाई बहन दोनों में बांटें बराबर जिम्मेदारी - फोटो : Istock
बराबरी से बांटें काम 

लड़का है तो वह घर के काम नहीं करेगा और लड़की है तो गेहूं पिसवाने नहीं जाएगी। यह भेदभाव भाई-बहन के बीच विरोध और लैंगिक असामनता को जन्म दे सकता है। खासकर आज के माहौल में जब पढ़ाई और नौकरी के लिए बच्चे केवल शहर से ही नहीं, देश से भी बाहर जाते हैं, तब और भी जरूरी हो जाता है कि उन्हें सभी जरूरी काम सिखाये जाएँ। चाहे फिर लड़के को आटा गूँधना सीखना हो या लड़की को कार की स्टेपनी बदलना सिखाना हो। यह काम आगे उनके लिए फायदेमंद साबित होंगे और उन्हें आत्मनिर्भर होने में मदद करेंगे। इसलिए अगर आप बहन में यह संस्कार डालते हैं कि थककर घर आये भाई को पानी का गिलास ऑफर करे तो यही आदत भाई में भी डालें। दोनों में हर काम बराबरी से बाँटें ताकि किसी को शिकायत न हो। 
विज्ञापन

5 of 6
प्रेम और सुविधाओं में न हो पक्षपात - फोटो : istock
समान प्रेम और सुविधाओं की आदत 

कई घरों में ऐसा होता है कि लड़की है, शादी करके दूसरे घर चली जाएगी, इसलिए उसे अतिरक्त सुविधाएँ और लाड़ दिया जाता है। चाहे फिर इसके लिए भाई को असुविधा ही क्यों न उठाना पड़े। वहीं कई घरों में शादी के बाद लड़की के मायके आने पर अविवाहित भाइयों को उनके रूटीन और सुविधाओं से सभी तरह के समझौते करने को कहा जाता है। यह स्थिति भाई-बहन के बीच दूरियां बढ़ा सकती है। एक-दो बार शायद बच्चे समझौता कर भी लें लेकिन बार-बार यह स्थिति बनने पर मन में कड़वाहट आने लगती है। इसलिए बचपन से ही दोनों बच्चों के बीच समान प्रेम की आदत डालें। उन्हें यह समझाएं कि आपका प्रेम दोनों के लिए बराबर है यह भी ध्यान रखें कि जो भी सुविधाएँ हों, वह दोनों के लिए समान हों। इससे वे आगे ख़ुशी ख़ुशी एक-दूसरे के लिए अपनी सुविधाओं को साझा करना और सामंजस्य बैठाना भी सीखेंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
रक्षाबंधन का महत्व बताएं - फोटो : अमर उजाला
राखी का महत्व समझाएं 

त्यौहार केवल धार्मिक या सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़े नहीं होते। त्योहार व्यक्ति की सोच, रचनात्मकता और अभिव्यक्ति के साथ ही उसके व्यक्तित्व में भी सकारात्मकता लाते हैं। आज भागदौड़ से भरी जिंदगी में यूँ भी मानवीय मूल्यों की कमी एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसलिए बच्चों को रक्षाबंधन का महत्व समझाएं। उन्हें बताएं कि यह त्यौहार केवल रक्त संबंधों से ही नहीं जुड़ा है बल्कि मानवीय मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। इसमें सुरक्षा और संबंधों की जिम्मेदारी भाई-बहन दोनों को बराबरी से निभानी पड़ती है। यदि आप बचपन से यह भावना बच्चों में विकसित रखेंगे तो बड़े होने पर भी वे इस भावना को मन में रखकर ही एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें