तुलना का बीज पैदा करता है मनमुटाव
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तुलना से बचने की आदत डालें
घर में अगर दो बच्चे हैं तो उनमें तुलना करना घातक भी साबित हो सकती है। रंग-रूप, पढ़ाई, खेल किसी भी तरह की तुलना गलत है। हर बच्चा अलग होता है और यह बात बड़ों को समझनी चाहिए। तुलना, बचपन से ही व्यक्ति के मन में हीनभावना, कुंठा, निराशा और गुस्से जैसी भावनाओं का प्रतिशत बढ़ा सकती है। इससे भाई-बहन के बीच का रिश्ता तो बिगड़ता ही है, बड़े होने पर भी वे कई बार मन में एक-दूसरे के प्रति बैर पाले रह सकते हैं। कई बार तो ऐसा भी होता है कि दो भाई या बहन जब एक ही स्कूल में पढ़ते हैं तो टीचर्स ही उनके बीच तुलना करने लगते हैं। इससे बच्चों के मन में भी खुद के सुपीरियर होने का भाव आ जाता है और वह तुलना उन्हें अच्छी भी लगने लगती है। बच्चों को एक-दूसरे की खूबियों के बारे में बताएं और उन्हें समझाएं कि वे अपने गुणों के विकास पर ध्यान दें। उन्हें एक-दूसरे से अच्छी बातें सीखने को प्रेरित करें। कम से कम परिवार में उन्हें इस अनचाही स्थिति से उबरने का माहौल दें। चाहे घर में हो या रिश्तेदारी में, कभी भी भाई-बहनों के बीच तुलना का बैर न आने दें।