relationship
मुझे डर था कि पापा नाराज होंगे लेकिन उन्होंने कहा, "तुम बैग उठाओ और निकलो वहां से।" मैं अपने 'ओरिजिनल सर्टिफिकेट्स' और एक किताब लेकर बस अड्डे की तरफ भागी। पति को मेसेज किया कि, 'मेरा जवाब ना है, मैं अपने घर जा रही हूं', और फोन स्विच ऑफ कर लिया। थोड़ी देर बाद मैं अपनों के बीच अपने घर थी। मैंने शादी के दो महीने में ही अपने पति का घर छोड़ दिया था। मेरा पति, साहिल, जिसे मैं आज से तकरीबन तीन साल पहले ग्रैजुएजशन के आखिरी साल में मिली।
वो बहुत हंसमुख था। मुझे उसका आस-पास रहना अच्छा लगता था और यूं ही आस-पास रहते हुए प्यार हो गया। हम घूमने जाते, घंटों फोन पर बातें करते। जिंदगी कुछ ज़्यादा ही मेहरबान थी, लेकिन ये गुलाबी रोमांस ज़्यादा दिन नहीं टिक सका। धीरे-धीरे मुझे लगने लगा कि ये वो बराबरी वाला रिश्ता नहीं है, जो मैं चाहती थी। ये रिश्ता वैसा ही होता जा रहा था जैसा मेरे मम्मी और पापा का था। फर्क इतना कि मम्मी कुछ नहीं कहती थीं और मैं चुप रह नहीं पाती थी। पापा छोटी-छोटी बातों को लेकर मम्मी पर चीखते, हाथ उठाते। मम्मी बस रोती रहतीं। साहिल के साथ बहस होती तो वो अक़्सर धक्का-मुक्की पर उतर आता और जबरदस्ती करीब आने की कोशिश करता। मैं मना करती तो चीखता चिल्लाता।