श्वेता और केशव जब 12वीं में थे, तभी से लगाव महसूस करते थे। एक-दूसरे से कोई अपेक्षा नहीं थी, कोई स्वार्थ नहीं। बस मिलना, साथ रहना, बातें करना अच्छा लगता था। साथ—साथ ग्रेजुएशन पूरा किया। एक साथ कॉलेज और कोचिंग सेंटर में आते-जाते। इसके बाद दोनों की नौकरी लग गई और श्वेता की शादी भी तय हो गई। श्वेता ने फोन पर केशव को यह बात बताई। उनके बीच प्रेम तो था, लेकिन निस्वार्थ था। आज भी दोनों अच्छे अंतरंग दोस्त हैं।
दरअसल, प्रेम जीवन के सुखद एहसासों में से एक है। प्रेम में आप अपने पार्टनर से क्या चाहते हैं? आकर्षण, चाहत, रोमांस, शादी, घर, परिवार और बहुत कुछ। पर क्या आपने कुछ ऐसे रिश्ते देखे हैं, ऐसा प्यार देखा है, जिसमें बहुत गहरा लगाव, निस्वार्थ भाव, अटूट विश्वास, समझदारी, ईमानदारी जैसे जज्बातों से ज्यादा और कोई स्वार्थ नहीं होता।