अनुवन्दना माहेश्वरी
शादी से पहले आपकी और साथी की परवरिश, पारिवारिक माहौल, संस्कार और रीति-रिवाजों में अंतर हो सकता है। ऐसे में शादी के बाद कुछ मतभेद और कभी-कभार टकराव होना स्वाभाविक है। नवदंपतियों के बीच अक्सर सामंजस्य की कमी या किसी अन्य बात पर मनमुटाव हो जाता है। कभी-कभी यह मतभेद से बढ़कर मनभेद तक पहुंच जाता है। दरअसल, अलग-अलग मानसिक स्तर, संस्कारों और परिवारों में परवरिश पाए दो लोग जब मिलते हैं तो संस्कारों का परस्पर संक्रमण होता है। यही संक्रांति यानी परिवर्तन नवदंपति स्वीकार नहीं कर पाते और पहले मतभेद और फिर टकराव शुरू हो जाता है। यदि थोड़ा-सा संयम बरतते हुए स्वीकार्यता बढ़ाई जाए तो इन मतभेदों को टकराव या विवाद में बदलने से रोका जा सकता है। कुछ युक्तियों के सहारे अपने रिश्ते पर मतभेद की छाया पड़ने से रोक सकती हैं।