रूपाश्री शर्मा
दखलअंदाजी किसी को भी पसंद नहीं होती, खासकर रिश्तेदारों की, मगर खुलकर मना भी नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस स्थिति से निपटने के लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे। रिश्तेदारों का हस्तक्षेप कई बार आपके लिए परेशानी बन जाता है, लेकिन आप कुछ गलत या दिल को बुरा लगने जैसा कहना भी नहीं चाहतीं, क्योंकि रिश्ते खराब होने का डर रहता है। ऐसे में, आपको कुछ सीमाएं तय करनी होंगी, ताकि आप रिश्तों की मिठास को बनाए रख सकें। लेकिन जरूरी है कि आप इसे समझदारी से हैंडल करें।
कुछ सीमाएं
साफ बोलो, सुखी रहो! यह बात हमेशा से बुजुर्ग बोलते आए हैं, जो कि काफी हद तक सही भी है। इसलिए अपने रिश्तेदारों को यह स्पष्ट रूप से बताएं कि आप किस तरह का व्यवहार स्वीकार करती हैं और किस तरह का नहीं। आप अपनी इन सीमाओं को दृढ़ता से और स्पष्ट रूप से बताएं। यदि वे आप की सीमाओं का सम्मान नहीं करते हैं तो उन्हें इसका अहसास कराएं, जैसे कि उनसे मिलना कम कर दें या फिर निजी जानकारी उन से साझा न करें।