समय में बदलाव के साथ-साथ लोगों में इतने बदलाव आ गए हैं कि उनकी मानसिकता को समझ पाना बिल्कुल मुश्किल हो गया है। बात किसी सामान की हो या रिश्तों की लोगों की सोच ऐसी बनती जा रही है जैसे हर चीज कुछ समय तक मन बहलाने के लिए बनी हो। जिससे जी भर जाए तो कुछ और ढूंढ लिया जाए। भारत में रिश्तों की भी कुछ ऐसी ही हालत हो गयी है।