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Parenting Tips: हर मां-बाप को बेटी को जरूर सिखानी चाहिए ये पांच बातें

Fri, 04 Feb 2022 02:16 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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mother and daughter - फोटो : pixabay
आजकल के दौर में लड़कियां और लड़कों की परवरिश एक समान की जाती है। ऐसे में दोनों के बीच भेदभाव करना गलत बात है। वहीं अपनी परवरिश में एक अभिभावक को कुछ चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए। जिससे कि उनकी बेटी मानसिक रूप से मजबूत हो। सही परवरिश की बदौलत ही लड़कियां बड़े होने पर अपने लिए खड़ी हो पाती हैं और सही-गलत का फैसला लेती हैं। तो चलिए कौन सी हैं वो बातें जो हर अभिभावक को अपनी बेटी को सिखानी चाहिए।
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mother and daughter - फोटो : pixabay
लड़कियों को हमशा दूसरों की देखभाल करना सिखाया जाता है। लेकिन इसके साथ ही ये बताने की भी जरूरत है कि वो अपनी देखभाल करें। ज्यादातर लड़कियां अपने माता-पिता से लेकर परिवार की देखभाल में अपना सारा समय निकाल देती है। लेकिन उन्हें ये समझानी के जरूरत है कि जब वो अपना ख्याल रखेंगी कि तभी दूसरे का भी रख पाएंगी। 
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मां बेटी - फोटो : Istock
आत्मनिर्भर बनना है जरूरी
शादी के बाद पति पर और शादी से पहले पिता पर आत्मनिर्भर बने रहना लड़कियों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती हैं। इसलिए जरूरी है शिक्षा-दीक्षा के साथ ही सही प्रशिक्षण की मदद से लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाया जाए। जिससे कि आर्थिक रूप से वो किसी और पर निर्भर ना रहें। आत्मनिर्भर होने से समाज में भी इज्जत मिलती है। 

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मां बेटी - फोटो : Istock
फैसले लेना सिखाएं
माता-पिता को अपनी बेटियों को बचपन से ही अपने फैसले लेने खुद लेने के लिए कहना चाहिए। हालांकि गलत निर्णयों को लेने पर माता-पिता का राह दिखाना जरूरी है। लेकिन अगर सही परवरिश के बाद वो सही फैसले ले रहीं है तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। 
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मां बेटी - फोटो : Istock
लड़ना सिखाएं
लड़कियों को गलत से लड़ने और अपने लिए सही निर्णय लेना आना चाहिए। मसलन किसी ने राह चलते गलत कमेंट्स पास किया तो इसके लिए अपने बेटी को जिम्मेदार ठहराने बजाय उसे गलत का सामना करने की सीख दें।
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मां बेटी - फोटो : Istock
आजादी सिखाएं
लड़कियों को आजादी से जीने का सही मतलब सिखाएं। जीवन की बागडोर किसी और के हाथ में होना गलत बात है। अगर उनकी बात कोई नहीं सुन रहा या फिर कहीं आने जाने से रोक रहा तो ये गलत है। उन्हें पता होना चाहिए कि आजादी से कैसे जीते हैं। इसके साथ ही बेटियों को ना बोलना सिखाएं। किसी के प्रभाव मे या दबाव में आकर गलत फैसले ना लें। इस बारे में उन्हें सिखाएं कि वो माता-पिता से बात करें।                                                                                                                                                                                                                                      
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