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Janmashtami 2023: सफल जीवन के लिए अपनाएं श्रीकृष्ण के पांच गुण, रुकावटें आसानी से होंगी दूर

Wed, 06 Sep 2023 07:14 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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श्रीकृष्ण के गुण - फोटो : istock
Krishna Janmashtami 2023: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का अवतार माना जाता है। धरती पर माता देवकी और वासुदेव के वंश में कन्हैया का जन्म हुआ। उनका जन्म पाप से मुक्ति दिलाने, भक्तों का उद्धार और दुष्टों का अंत करने, महाभारत के जरिए जीवन का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से हुआ था।

उनका पूरा जीवन ही मानव जाति के लिए एक सीख की तरह रहा। बचपन में अपनी शैतानियों और नटखट व्यवहार से वह खेल-खेल में लोगों को सही और गलत में फर्क सिखाया करते। एक किस्सा है कि कैसे नटखट कान्हा गांव की महिलाओं के वस्त्र चुरा लिया करते, जब वह यमुना जी में स्नान के लिए जाती थीं। उन्होंने ऐसा करके एक बड़ा संदेश दिया।

वहीं राधा रानी से कृष्ण प्रेम करते थे लेकिन विवाह नहीं किया, इस तरह उन्होंने धर्म और कर्म का पाठ पढ़ाया। महाभारत के समय अर्जुन के सारथी बन उन्होंने असत्य और पाप के खिलाफ अपनों के भी विरुद्ध खड़े हो जाने की सीख दी। श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई किस्से आपको जीवन को सरल बनाने का पाठ पढ़ाते हैं। कृष्ण के गुण सफलता का मार्ग दिखाते हैं। इस वर्ष 6-7 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी है। इस मौके पर भगवान कृष्ण के कुछ गुणों को अपनाकर जीवन में सफलता का मार्ग तलाश सकते हैं।
 
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श्रीकृष्ण के गुण - फोटो : Facebook
साधारण जीवन जीना

भगवान श्रीकृष्ण के कई गुणों में से एक उनका साधारण जीवन जीने की कला है। वह एक बड़े घराने से संबंध रखते थे । कान्हा गोकुल के राजा नंद के पुत्र थे। लेकिन उन्हें इस बात का घमंड नहीं था। वह ग्वाल बालों संग गायों को चराने जाया करते थे। साधारण जीवन जीते थे। उन्होंने अपने इस गुण से संदेश दिया कि कभी भी अपने पद पर अभिमान न करें। सबके साथ समान व्यवहार करें।
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श्रीकृष्ण के गुण - फोटो : सोशल मीडिया
मुश्किल में साथ देना

श्रीकृष्ण का एक गुण रहा कि वह दूसरों की मदद करते थे। सुदामा उनके गरीब मित्र थे लेकिन राजा होते हुए भी माधव को इस बात का घमंड नहीं था। जब सुदामा उनसे मिलने आए तो वह द्वार तक सुदामा जी को लेने पहुंच गए। पांडवों की पत्नी द्रौपदी श्रीकृष्ण की सखा थीं, जब उनका चीरहरण हो रहा था तो देवकीनंदन ही उनकी मदद के लिए आगे आए। जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध हुआ और दोनों मदद के लिए द्वारिकाधीश के पास पहुंचे तो कृष्ण ने ये जानते हुए कि कौरवों की सेना बहुत बड़ी है, उन्होंने पांडवों का साथ दिया। बिना अमीर-गरीब, लिंग और जाति देखे वह मुश्किल वक्त में अपनों का साथ देने से पीछे नहीं हटते थे। उनके इस गुण को अपना सकते हैं।

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श्रीकृष्ण के गुण - फोटो : amar ujala
नहीं देखें हैसियत

गोपाल ने दोस्ती करते समय कभी यह नहीं सोचा कि उनका दोस्त अमीर है या गरीब। खुद राजा होते हुए उन्होंने सुदामा की दोस्ती प्रिय थी। बचपन में एक ही आश्रम में दीक्षा लेने के बाद दोनों की परिस्थितियां बदलीं लेकिन सालों बाद जब सुदामा उनके राज्य पहुंचे तो द्वारिकाधीश ने उनका ऐसे स्वागत सत्कार किया, जैसे सुदामा से बड़ा और खास मेहमान कोई हो ही नहीं सकता था। कृष्ण सुख दुख के साथी हैं।
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श्रीकृष्ण के गुण - फोटो : सोशल मीडिया
सही मार्गदर्शन

श्रीकृष्ण ने हमेशा सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने महाभारत के समय गीता के उपदेश दिए। 'कर्म करते जाओ फल की इच्छा मत करो।',धर्म की रक्षा के लिए अपनों के भी विरुद्ध खड़े हो जाओ।, जैसे कई उपदेश उन्होंने अर्जुन को दिए और सारथी बनकर पूरे युद्ध में अर्जुन व पांडवों का साथ दिया। जब भी अर्जुन व्याकुल हुए उनका सही मार्गदर्शन किया।
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