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Friendship Day 2023: लाइक और कमेंट से ऊपर है सच्ची दोस्ती, सोशल मीडिया के फ्रेंड्स और वास्तविक दोस्त में अंतर

Sun, 06 Aug 2023 03:05 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Friendship tips - फोटो : istock
प्रज्ञा पाण्डेय

दोस्ती एक भावनात्मक बंधन है। इसमें एक लगाव होता है, लेकिन सोशल मीडिया के दौर ने दोस्ती की परिभाषा को थोड़ा बदल दिया है। अब आपको दोस्तों से मिलने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं, बल्कि वे फोन या लैपटॉप के जरिये आपके घर में हो सकते हैं। आज के दौर में सोशल मीडिया पर दोस्ती बहुत आसान हो गई है, वहीं वास्तविक दोस्ती करना हमेशा से कठिन रहा है और आज भी है। लेकिन क्या सोशल मीडिया मित्र, वास्तविक जीवन मित्र के विकल्प हो सकते हैं?

असली दोस्ती, विश्वास और गहरे जुड़ाव पर आधारित होती है। सोशल मीडिया फ्रेंडशिप आमतौर पर लाइक और कमेंट पर टिकी होती है।
 
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Friendship tips - फोटो : istock
संतुष्टि और लगाव

वास्तविक जीवन में मौजूद दोस्तों से बेहद लगाव होता है। ऐसे में उन दोस्तों के भौतिक रूप से मौजूद होने से गहरा भावनात्मक जुड़ाव और अपने अनुभव साझा करने से संतुष्टि मिलती है। इसका आपके स्वास्थ्य पर भी अच्छा असर पड़ता है। करीबी मित्र कठिन समय में आपका सहारा बनते हैं तो आपके साथ खुशियां भी बांटते हैं। उदास होने पर न केवल आपके दिल का हाल सुनते हैं, बल्कि आपका मनोरंजन भी करते हैं। इसके अलावा वास्तविक दोस्त एक साथ किसी कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं, जैसे कि पार्टी, संगीत समारोह, यात्रा या सिर्फ घूमना। सोशल मीडिया के मित्र विचार में आते तो जरूर हैं, लेकिन उनके साथ अनुभवों को साझा करने के लिए वैकल्पिक संभावनाएं नहीं होती हैं।
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Friendship tips - फोटो : Istock
सोशल मीडिया पर चुनाव क्यों 

सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है, जहां किसी से दोस्ती करना बहुत आसान है। आप न केवल दोस्ती करती हैं, बल्कि अपने मन की बातें भी कह सकती हैं। लेकिन वास्तविक जिंदगी में मित्रता करने से पहले आप कई बार सोचती हैं कि आप जिसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रही हैं, वह आपके बारे में क्या सोचती है

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Friendship tips
जरूरत के समय सहारा

वास्तविक दोस्त जरूरत के समय मदद के लिए पहुंच जाते हैं। वे समर्थन, सहानुभूति या मुश्किल समय में बातचीत करके मन को शांति प्रदान कर सकते हैं। सोशल मीडिया के मित्र इस प्रकार की मुश्किलों में आपकी न तो सहायता कर सकते हैं और न ही भावनात्मक सहयोग कर सकते हैं।
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Friendship tips - फोटो : istock
धोखे की आशंका

सोशल मीडिया के मित्रों से धोखा मिलने की आशंका वास्तविक मित्रों की तुलना में अधिक होती है। वास्तविक दोस्त को आपके इर्द-गिर्द जानने वालों की संख्या अधिक होती है और आप समय रहते कोई भी जानकारी प्राप्त होने पर उसकी जांच कर सकती हैं। लेकिन ऑनलाइन दोस्ती में सहेली या दोस्त को जानने वाले आपके अलावा कम लोग होते हैं। ऐसे में उनकी जांच करना मुश्किल होता है।

फिर मुश्किल कहां है

सोशल मीडिया पर दिखावा अधिक है, मगर वहां आसानी से दोस्ती हो जाती है। इसलिए सोशल मीडिया फ्रेंड की संख्या वास्तविक मित्रों से अधिक होती है। 
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Friendship tips - फोटो : Istock
बरेली कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हेमा खन्ना बताती हैं, सोशल मीडिया पर की गई मित्रता से निश्चित रूप से कुछ स्तर की दोस्ती और जुड़ाव प्राप्त हो सकता है, लेकिन वे वास्तविक जीवन के दोस्तों का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकते। सोशल मीडिया बिछड़े दोस्तों से मिलवाने एवं परिचय के लिए मदद कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक जुड़ाव महसूस करने में यह असफल होगा। असली दोस्ती, विश्वास और गहरे जुड़ाव पर आधारित होती है, जबकि सोशल मीडिया फ्रेंड्स समर्थन और एक संबंध का अहसास देते हैं। वे आपको इतने गहरे रूप से नहीं जानते।
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