प्यार और फिक्र को लेकर आजकल कई सारे युवा संशय में रहते हैं। अक्सर युवा गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं और जो फिक्र होती है, उसे प्यार समझ बैठते हैं और जो वास्तविक प्रेम होता है, उसे फिक्र मात्र समझकर त्याग देते हैं। ऐसा करने से रिश्तों पर तो प्रभाव पड़ता ही है, साथ ही खुद की भावनाएं भी आहत होती हैं जो कि कहीं न कहीं मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बिल्कुल भी ठीक नहीं है इसलिए चंद बातों को ध्यान में रखने से आप इस दुविधा से बच सकते हैं। अगली स्लाइड्स में बताए गए संकेतों पर गौर फरमाकर आप आसानी से प्यार और फिक्र में अंतर कर सकते हैं।