मदर्स डे के मौके पर हम आपको सुना रहे हैं, उन मांओं की कहानियां, जिन्होंने अपने बच्चों को ऐसी सीख दी कि उन्होंने सफलता का शिखर छू लिया।
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मदर्स डे
मां, यह शब्द सुनते ही नि:स्वार्थ प्रेम, वात्सल्य, करुणा और समर्पण की वह मूरत सामने आ जाती है, जो जीवन दायिनी है। एक मां ही है जो अपने बच्चे को हर हाल में स्वीकार करती है, उसे हर दुख से बचाती है। जीवन की तेज धूप में मां शीतल छाया की तरह हमेशा साथ रहती है...
मां मुझ से अक्सर कहा करती है/ तेरे रहने से घर में हवा रहती है
उसकी थपकी से जाग न जाऊं/ हल्के-हल्के छुआ करती है...
ऊबड़-खाबड़ इस जीवन को/ करती जाती समतल-समतल
मां मेरी गंगाजल जैसी/ बहती जाती कल-कल, कल-कल...
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बेटी के साथ निलांबरी जगदाले
दिन भर की थकान बेटी की एक मुस्कान पर कुर्बान: निलांबरी जगदाले
मेरी तीन साल की बेटी है नित्या। ड्यूटी के साथ साथ बेटी की देखभाल करना मुश्किल होता है। दिनभर की सारी थकान नित्या की एक मुस्कान से दूर हो जाती है। कैसे भी करके उसके लिए समय निकालती हूं। जब मैं दफ्तर में होती हूं तो बेटी को केयर टेकर के भरोस छोड़कर आती हूं। बीच बीच में फोन पर उससे बात करती रहती हूं। रात में जब घर पहुंचती हूं तो वह सो चुकी होती है। सुबह पांच बजे उठकर उसके लिए फूड तैयार करने के बाद एक्सरसाइज करती हूं। इसके बाद उसके साथ गार्डन में समय बिताती हूं। फिर ऑफिस के लिए निकल जाती हूं। मेरे पति डा. चैतन्या सेना में मेजर हैं। फिलहाल उनकी पोस्टिंग भूटान में है। उम्मीद है कि अगले महीने उनकी पोस्टिंग कसौली में हो जाएगी। इसके बाद वह भी नित्या से जल्दी-जल्दी मिल पाएंगे। वर्किंग वुमन के लिए बच्चों की देखभाल करना वाकई मुश्किल होता है। -निलांबरी जगदाले, एसएसपी, यूटी
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परिवार के साथ शिखा नेहरा
मां बेटी का अनोखा रिश्ता
मैं सेक्टर 7 में अपने घर के सामने खड़ी थी। अचानक एक तीन साल की बच्ची ने पीछे से आकर मुझे मम्मी कहकर पुकारा। मैं चौंकी, देखा गुलाबी रंग की फ्रॉक पहने एक मासूम सी गुड़िया खड़ी थी। तब मेरी उम्र 23 साल थी। मेरी शादी नहीं हुई थी। वह मेरी पड़ोसन प्रोमिला की बेटी भावना थी। इसके बाद तो उससे ऐसा नाता जुड़ा जो आज तक टूटा नहीं। आज मैं खुद एक बेटे की मां हूं। यह नाता भी 21 साल पुराना हो चुका है। मेरा एक 13 साल का बेटा केतन है। लेकिन पहली बार मां शब्द भावना के मुंह से सुनकर जो सुखद अनुभव हुआ उसे बयां नहीं कर सकती। एक ऐसा अहसास जो मुझे अंदर तक छू गया। मैं कुंवारी थी लेकिन भावना ने मुझे मां का दर्जा दे दिया। भले ही नादानी में शुरू हुई यह कहानी मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गई। आज भावना करनाल में पढ़ाई के लिए चली गई है। लेकिन आज भी वह मुझे मां ही कहती है। अपनी सारी बातें वह अपनी असली मां के बजाय मुझसे शेयर करती है। वह मेरी अच्छी सहेली भी बन गई है। हम मां और बेटी का यह रिश्ता बस रिश्तों से ऊपर है। -शिखा नेहरा, मीडिया आफिसर, पंजाब राजभवन
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मां के साथ यूपीएससी टॉपर
मां की प्रेरणा से ही मैंने पाई सफलता
मेरी उम्र तब तीन साल की थी। स्कूल में यूनिट एग्जाम था। उसी दिन मेरे मामा की शादी भी थी। सब शादी में शरीक होने के लिए गुजारिश कर रहे थे लेकिन मेरी मां ने मेरे एग्जाम को प्राथमिकता देते हुए शादी में जाना कैंसल कर दिया। इस छोटे से त्याग से शुरू हुआ सिलसिला बदस्तूर जारी है। हम दो भाई हैं। हमारे कैरिअर के लिए मां ने अपने सारे सुख न्योछावर कर दिए। दो प्रयास में जब मैं यूपीएससी में सफल नहीं हो पाया तो बहुत उदास हो गया। तब वह मां ही थीं, जिन्होंने मुझमे यह भरोसा जगाया कि कोशिशें हमेशा कामयाब होती हैं। मनुष्य को कर्म पर ध्यान देना चाहिए न कि उसके परिणाम पर। इसका ही नतीजा है कि तीसरे प्रयास में मैंने यूपीएससी में 34वीं रैंक पाई। मैं अपनी मां का कर्ज अब समाज सेवा के जरिए चुकाऊंगा। -गौरव, यूपीएससी में 34वीं रैंक
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मां के साथ मेघा अरोड़ा
मेरी मां ही मेरी बेस्ट फ्रेंड
मेरी सफलता की कहानी मां से शुरू होती है और उन्हीं पर खत्म भी। हमेशा मां ने मुझे हौसला दिया। जब कभी मैं परेशान होती तो मां आकर मुझे संभालतीं। अपनी चीफ कमिश्नर की जॉब के साथ साथ उन्होंने जिस तरह से मुझे समय दिया, वह मेरे लिए किसी सौगात से कम नहीं है। यूपीएससी की तैयारी के लिए मैंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। इस दौरान सिर्फ पढ़ाई पर ही फोकस करती थी। बीच बीच में कभी विश्वास डगमगाता तो मां से बात करती। मैंने तीन प्रयासों के बाद यह सफलता पाई लेकिन वह मां की प्रेरणा थी, जिसकी बदौलत मैं अपनी तैयारियों में जुटी रही। मैंने इस बार 108वीं रैंक के साथ यूपीएससी क्लियर किया तो सबसे ज्यादा खुशी मां को हुई। अब मेरी बारी है मां पर खुशियां लुटाने की। - मेघा अरोड़ा, यूपीएससी में 108वां रैंक
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मां के साथ हिमांशी
मां का साथ ही मेरा नसीब बना : हिमांशी
इंटरनेशनल लेवल पर ताइक्वांडो में बेहतरीन उपलब्धियां हासिल कर देश का नाम रौशन कर रहीं हिमांशी ने कहा कि मदर्स डे हर बार मेरे लिए सबसे बड़े त्योहार की तरह रहता है। इस दिन का मैं साल भर से इंतजार करती हूं। इसके लिए पहले ही प्लानिंग शुरू कर देती हूं। इस बार मां के साथ आउटिंग पर जाने का प्लान बनाया है। इस समय अपनी मां के साथ एयरपोर्ट पर हूं। दूसरे शहर में जाकर मदर्स डे सेलिब्रेट कर रही हूं। हिमांशी ने कहा कि ताइक्वांडो की ब्लैक बेल्ट हासिल करना हर खिलाड़ी का सपना होता है। मेरी मां अमिता खुद ताइक्वांडो की खिलाड़ी और कोच हैं। उन्हीं से प्ररेणा लेकर इस फील्ड में आई। बचपन से लेकर आज तक मेरी मां का साथ ही मेरा नसीब बना।
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शुभमन गिल
आईपीएल की पहली फिफ्टी मां को समर्पित : शुभमन गिल
मदर्स डे हर बच्चे के लिए खास होता है। दुनिया भर में 13 मई को मदर्स डे मनाया जाता है। ट्राइसिटी के स्टार खिलाड़ी कामयाबी के पीछे अपनी मां का ही आशीर्वाद मानते हैं। अंडर 17 वर्ल्ड कप से रातों रात सुर्खियां बटोरने वाले शुभमन गिल के लिए इस बार का मदर्स डे काफी लक्की रहा। आईपीएल में बिजी होने की वजह से वह इस बार अपनी मां के साथ मदर्स डे सेलिब्रेट नहीं कर पाएंगे। लेकिन उन्होंने आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ लगाई गई फिफ्टी को अपनी मां किरत गिल को मदर्स डे पर गिफ्ट के तौर पर समर्पित किया।
भारतीय वुमन टीम में जगह मां की बदौलत : तान्या
एशिया कप टी-20 के भारतीय वुमन क्रिकेट टीम में चुनी गईं तान्या भाटिया ने बताया कि वे भारतीय क्रिकेट टीम के कैंप में हिस्सा लेने के लिए बड़ौदा हैं। एशिया कप मलयेशिया में खेला जाएगा। इसी महीने के शुरू में तान्या का चयन सीनियर भारतीय वुमन टीम में हुआ है। तान्या ने कहा- मुझे पता है रविवार को मदर्स डे। मां को कोई गिफ्ट नहीं दे पाऊंगी, लेकिन मां मेरे लिए सबसे स्पेशल है। कैंप में जैसे ही एक-दो दिन की छुट्टी मिलेगी तो चंडीगढ़ आकर मां सपना के साथ आउटिंग करके मदर्स डे को मनाने का प्लान बनाया है। तान्या ने बताया कि भारतीय वुमन टीम में जगह अपनी मां की बदौलत बना पाई। उनके इस प्रयास को जिंदगी भर नहीं भुला सकती। कई साल से मदर्स डे मां के साथ मनाती आ रही हूं।