माता के मंदिर में आम दिनों में भी भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्रि के खास मौके पर श्रद्धालु अधिक संख्या में उमड़ते हैं। इसी सिलसिले में हम आपको बताने जा रहे हैं कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मौजूद माता के मंदिर में भी खूब भक्तों की भीड़ लगती हैं। कुरुक्षेत्र में भद्रकाली देवीकूप मंदिर स्थित है। मां भद्रकाली देवीकूप मंदिर में सती माता का दायां टखना गिरा था और इसके बाद यह प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां काली के आठ स्वरूपों में से एक है। आइए आपको बताते हैं कि इस मंदिर की क्या खासियत है और लोगों के बीच किस तरह की मान्यताएं हैं।
विज्ञापन
2 of 5
भद्रकाली शक्तिपीठ का इतिहास माता सती से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव सती के मृत देह को लेकर ब्राह्मांड में घूमने लगे तो भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र के जरिए सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया। जहां-जहां देवी सती के अंग गिरे वहां पर शक्तिपीठ की स्थापना की गई।
विज्ञापन
3 of 5
मां भद्रकाली देवीकूप में सती माता का दायां टखना गिरा था। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का यहां मुंडन संस्कार भी करवाया गया था। इस मंदिर का संबंध महाभारत से भी माना जाता है। युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मां भद्रकाली की पूजा-अर्चना करने को कहा था।
4 of 5
- फोटो : Social media
अर्जुन ने कहा था कि युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद वह यहां पर घोड़ा चढ़ाने आएंगे। युद्ध जीतने के बाद अर्जुन ने माता को अपना श्रेष्ठ घोड़ा अर्पित किया था। तभी से ऐसी मान्यता है कि यहां पर श्रद्धालु सोने, चांदी व मिट्टी के घोड़े चढ़ाते हैं।