फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Anti bullying: आपके बच्चे को कोई कर रहा बुली, इन संकेतों से जानें

Tue, 20 Sep 2022 10:07 AM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 9
किसी भी स्तर तक हो सकती है प्रताड़ना - फोटो : istock
स्कूल जाने वाले बच्चे के सामने होमवर्क, अच्छे मार्क्स लाने और परीक्षा देने जैसी चुनौतियाँ ही नहीं होतीं। इनके अलावा और भी कई चीजें हैं जो बच्चे को परेशान कर सकती हैं और किसी बुली का उसकी जिंदगी में होना भी ऐसी ही एक बड़ी चुनौती है। होमवर्क, परीक्षा आदि तो सकारात्मक चुनौतियाँ हैं जो बच्चे के भविष्य को संवारने में मदद करती हैं लेकिन बुली से पीड़ित होने की स्थिति इसके उलट उसका वर्तमान और भविष्य दोनों बिगाड़ सकती है। रफ्तार से भरे दौर में जिस तेजी से संवेदनाएं खत्म हो रही हैं वहां बुली करने वाले लोग और ऐसी स्थितियां अब पहले से और अधिक बिगड़े स्वरूप में सामने आ रही हैं। 

शरीर के आकार, रंग-रूप, आर्थिक या पारिवारिक स्थिति, आदि जैसे कई पहलू हैं जिनको लेकर बच्चे को बुली किया जा सकता है। बुली करना यानी सामान्य भाषा में समझें तो किसी को परेशान करना, सताना, प्रताड़ना देना या दुर्व्यवहार करना। स्कूलों में आजकल इसकी घटनाएं बढ़ रही हैं और परेशान करने के तरीके पहले की तुलना में अधिक हिंसक होते जा रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि अगर बच्चा इसका शिकार हो रहा है तो उसको समय पर मदद मिले। 
विज्ञापन

2 of 9
बच्चे के लिए कठिन होती परिस्थिति - फोटो : सोशल मीडिया
मजाक उड़ाने से लेकर शारीरिक हिंसा तक 

जिस तेजी से हमारी जिंदगियों में मशीनीकरण और वर्चुअल दुनिया की घुसपैठ हुई है, उसी तेजी से लोगों में भावनाओं और संवेदनाओं के स्तर में भी कमी आई है। इसका सबसे बुरा पहलू छोटे बच्चों में बढ़ती हिंसक घटनाओं और उनके व्यवहार में आये नकारात्मक परिवर्तन के रूप में सामने आ रहा है। स्कूलों में छोटी सी किसी बात को लेकर बच्चों में मार-पीट और दुर्व्यवहार आम होते जा रहे हैं। इसके लिए कई चीजें दोषी हैं और इन पर विचार करने और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसके साथ ही एक और जरूरत है अपने बच्चे को लेकर सजग रहने की। अगर आपका बच्चा ऐसी किसी घटना का शिकार हो रहा है तो उसे तुरंत सहायता दें। मनोवैज्ञानिक स्तर पर इस तरह की घटनाएं बच्चे के पूरे व्यक्तित्व और जीवन पर बहुत  बुरा असर डाल सकती हैं। इसलिए ध्यान रखें अगर आपके बच्चे में ये 6 परिवर्तन दिखाई दें तो। 
विज्ञापन

3 of 9
चुप्पी लगा जाना हो सकता है संकेत - फोटो : amar ujala
1. गुमसुम रहने लगे 

पूरे घर में चहकता, उछलता और मस्ती करता बच्चा यदि अचानक चुप रहना पसंद करने लगे, आपके सवालों के जवाब टालने लगे या बात करते करते कहीं खो जाये तो तुरंत उसपर ध्यान दें। शुरुआत में अक्सर बच्चे स्थिति को समझ नहीं पाते, वे यह नहीं जानते कि इसको लेकर क्या किया जाए। साथ ही वे डर, घबराहट, दबाव आदि से भी जूझ रहे होते हैं, लिहाजा वे चुप से रहने लगते हैं। टीन एज की ओर कदम बढ़ा रहे बच्चों में भी सामान्यतः ऐसे परिवर्तन देखे जाते हैं जो कि समय के साथ ठीक हो सकते हैं लेकिन ये परिवर्तन बुली होने की वजह से भी हो सकते हैं और दोनों ही स्थितियों में बच्चे को सहायता और संबल की जरूरत होती है। इसलिए बच्चे से धैर्य के साथ पूछें और जब तक उसकी उदासी का कारण न मिल जाए, आप उसका समाधान न ढूंढ लें, तब तक रुकें नहीं। 
 

4 of 9
खाने से दूरी बना लेता है बच्चा - फोटो : iStock
2. खाने और सोने में परेशानी 

मसालेदार कोई सब्जी या मनपसंद मिठाई को देखकर भी बच्चा अब उत्साहित नहीं होता, वह खाने को लेकर असमंजस में पड़ा रहता है, हर चीज खाने से पहले देर तक सोचता है, कई बार खाने को देखकर डरने भी लगता है, कहीं बाहर खाने जाने की बात से ही बिदक उठता है, तो इसे हल्के में न लें। हो सकता है कि कोई उसे बढ़ते वजन या अन्य शारीरिक स्थिति के लिए चिढ़ाता हो या परेशान करता हो या फिर बच्चे पर किसी का दबाव हो। इसी तरह बच्चे की नींद में रुकावट आ रही हो, वह नींद से चौंककर, डरकर उठ जाता हो, नींद आने के बावजूद सोने से डर रहा हो, आदि। ऐसी स्थिति में भी उसकी उलझन और समस्या पर तुरंत ध्यान दें। हो सकता है बच्चे के दिमाग में किसी चीज का डर बैठाया गया हो जिसको लेकर उसके मन में असुरक्षा का भाव आ गया हो। उसके मन से यह डर निकालना बहुत जरूरी है। 
विज्ञापन

5 of 9
कपड़ों को लेकर रहे निराशावादी रवैया - फोटो : isrock
3. पहनावे को लेकर असमंजस 

बच्चा नए कपड़ों को लेकर उत्साहित न हो। खासकर लड़कियों के मामले में बुलीइंग की यह स्थिति आम है। शारीरिक संरचना को लेकर किये जाने वाले कमेंट्स अक्सर बच्चे में हीनभावना लाने लगते हैं। इस वजह से वह अपने आपको लेकर निरुत्साहित रहने लगते हैं। अच्छे कपड़े पहनने में भी उन्हें हिचक और असमंजस होने लगता है। उन्हें लगता है उनके ऊपर कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा। कुछ बच्चे इस स्थिति में बहुत ढीले या बहुत टाइट कपड़े भी पहनने लगते हैं जिसका असर उनकी सेहत पर भी पड़ सकता है। यहाँ बहुत जरूरी है बच्चे को सम्पूर्ण व्यक्तित्व यानी उसके गुणों और कौशल से भरपूर व्यक्तित्व के बारे में बताया जाए और उसके विकास पर ध्यान दिया जाए। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बना रहेगा और वह खुद को लेकर बन रही नकारात्मक सोच से बाहर आएगा। 
विज्ञापन

6 of 9
बच्चे के भावों को धैर्य से समझें - फोटो : istock
4. चिड़चिड़ाहट और गुस्सा 

बेवजह का गुस्सा दिखाना, छोटी छोटी बात पर चिढ़ने लगना, खीज जाना, रूठकर बैठ जाना, अगर आपके बच्चे में यह सब लक्षण अचानक दिखने लगे हैं और हफ्ते भर से ज्यादा समय से लगातार ये लक्षण बढ़ रहे हैं तो ध्यान देना आवश्यक है। बच्चों का एक बहुत अच्छा गुण होता है। वे किसी बात पर ज्यादा समय गुस्सा नहीं रहते और सामान्य माहौल में गुस्सा भूलकर फिर हँसने खेलने लगते हैं लेकिन यदि वे लगातार गुस्से या चिढ़ जैसे लक्षण दिखा रहे हैं तो हो सकता है इसके पीछे कोई वजह हो, हो सकता है कोई ऐसा व्यक्ति या स्थिति हो जिसपर उनका नियंत्रण न हो और जो उन्हें रोज परेशान कर रही हो। ऐसे में बच्चे पर क्रोध करने या चिढ़चिढ़ाने की बजाय शांति से उसको बैठाकर बात करें। उसे यह यकीन दिलाएं कि आप उसकी समस्या को सुनने और सुलझाने में पूरा योगदान देंगे लेकिन इसके लिए उसे पहले समस्या बतानी होगी।  
विज्ञापन

7 of 9
स्कूल का डर हो बच्चे पर हावी - फोटो : फाइल फोटो
5 स्कूल जाने से मना करना 

यह स्थिति तब बन सकती है जब बच्चा दुर्व्यवहार करने वाले का सामना तक करने से डरने लगे। उसे स्कूल या कोई भी वह जगह जहाँ उसे परेशान किया जा रहा है, वहां जाने के ख्याल मात्र से ही परेशानी होने लगे। पहले पहल वह इसके लिए पेट दर्द, सिर दर्द जैसे आम बहाने बना सकता है, बाद में वह साफ़ मना करने की स्थिति में आ जायेगा। इस समय बजाय उस पर उस जगह जाने का दबाव डालने के उसका कारण जानने की कोशिश करनी जरूरी है। इसके लिए आप स्कूल के टीचर्स, बच्चे के दोस्त और सहपाठी आदि लोगों से भी मदद ले सकते हैं। खासकर अगर बच्चा स्कूल जाने का कारण बताने से डर रहा हो तो। एक बार कारण सामने आने पर तुरंत एक्शन लेना भी उतना ही जरूरी है। 

8 of 9
घुलना मिलना न चाहे बच्चा - फोटो : फाइल फोटो
6. डर और अकेले रहने की जिद 

यह आमतौर पर उन बच्चों के साथ अधिक होता है जो पहले से थोड़े रिजर्व होते हैं और घर पर भी ज्यादा बोलते नहीं। ऐसे बच्चों को घर के सुरक्षित माहौल में कभी शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ती लेकिन जब बाहर (स्कूल में) वे असुरक्षित लोगों से घिरते हैं तो समझ नहीं पाते कि इसकी शिकायत किससे और कैसे करें। नतीजा, वे और चुप रहने लगते हैं, जिसका फायदा परेशान करने वाले के लिए और भी ज्यादा हो जाता है। कई बार परेशान करने वाला बच्चे को किसी तरह की धमकी भी दे सकता है कि अगर उसने किसी को बताया तो उसे या उसके परिवार को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चा और भी अधिक डरने लगता है। उसका डर ही उसके अकेले रहने का भी कारण बनता है। वह सामाजिक और पारिवारिक उत्सवों या गेदरिंग्स में जाने से, लोगों से मिलने-जुलने से कतराने लगता है व ज्यादातर समय अकेले रहकर बिताना चाहता है। यह स्थिति लगातार तीन-चार दिन भी दिखे तो तुरंत बात का पता लगाइये। 
विज्ञापन

9 of 9
बच्चे से सहजता से बात करें - फोटो : istock
हमेशा सहायता के लिए तैयार रहिये

बच्चे जीवन को सीख रहे होते हैं। बुली जैसी घटनाएं उनके मन पर बहुत बुरा असर डालती हैं और यदि इनका समाधान न हो तो ये बुरा असर स्थाई भी हो सकता है। इसलिए जब भी बच्चे में कोई ऐसा परिवर्तन दिखे जो नया है और अजीब भी, तो तुरंत उससे बात करना जरूरी है। बजाय उसपर गुस्सा होने, अधीरता दिखाने या घबराने के, शांति से उसकी पूरी बात सुनने और उसे यह भरोसा दिलाने की जरूरत होती है कि हम तुम्हारे साथ हैं और हमेशा रहेंगे। यदि शुरुआती दौर में ही बच्चे को सकारात्मक तरीके से इस समस्या को सुलझाने का रास्ता बता दिया जाए तो उसका आत्मविश्वास बना रहता है और वह जिंदगी की चुनौतियों से लड़ने का हौसला भी बनाये रखता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें