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Parakram Diwas 2023: 23 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है पराक्रम दिवस? जानिए इतिहास और सुभाष चंद्र बोस से नाता

Mon, 23 Jan 2023 09:39 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पराक्रम दिवस - फोटो : amar ujala
Parakram Diwas 2023: पूरे देश में जनवरी माह में पराक्रम दिवस मनाया जा रहा है। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पराक्रम दिवस को मनाने की घोषणा की थी। पराक्रम दिवस के मौके पर कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है। स्कूल कॉलेज में बच्चों को इस दिन का महत्व बताया जाता है और इसी दिन के जरिए स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन को याद किया जाता है। पराक्रम दिवस को मनाने के पीछे खास वजह है। इस दिन का नाता महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस से है।  उनकी ही याद में पराक्रम दिवस को देश के एक खास दिन के रूप में मनाते हैं। नेताजी को इस दिन नमन किया जाता है और उनके योगदान को याद करते हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी की लड़ाई में ओजस्वी नारा दिया था। 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।' इन नारे ने हर भारतीय के खून में उबाल ला दिया था और आजादी की जंग को तेज कर दिया था। आइए जानते हैं पराक्रम दिवस कब मनाते हैं। इस दिन को मनाने की शुरुआत क्यों हुई और नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पराक्रम दिवस से क्या नाता है।
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सुभाष चंद्र बोस जयंती की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
कब है पराक्रम दिवस?

पराक्रम दिवस प्रतिवर्ष 23 जनवरी को मनाया जाता है। वर्ष 2021 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पराक्रम दिवस को 23 जनवरी के दिन मनाने का फैसला किया। उसके बाद से हर साल पराक्रम दिवस मनाया जा रहा है।
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सुभाष चंद्र बोस जयंती की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
23 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं पराक्रम दिवस?

23 जनवरी को पराक्रम दिवस मनाने की वजह बेहद खास है। दरअसल यह दिन सुभाष चंद्र बोस की याद में मनाया जाता है। सुभाष चंद्र बोस का 23 जनवरी को जन्म हुआ था। इस दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जाती है, जिसे पराक्रम दिवस का नाम दिया गया।

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सुभाषचंद्र बोस की जयंती - फोटो : amar ujala
सुभाष चंद्र बोस का पराक्रम दिवस से नाता

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का संपूर्ण जीवन हर युवा और भारतीय के लिए आदर्श है। उन्होंने आजादी की जंग में शामिल होने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा का परित्याग कर दिया और इंग्लैंड से भारत वापस लौट आए। स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई में उन्होंने आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज का गठन किया। खुद का आजाद हिंद बैंक स्थापित किया जिसे 10 देशों का समर्थन मिला। आज़ादी की जंग में उनके योगदान और उनके पराक्रम को याद करने के लिए सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के तौर पर मनाया जाता है।
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सुभाषचंद्र बोस की जयंती - फोटो : amar ujala
पराक्रम दिवस पर विश्व रिकॉर्ड

वर्ष 2023 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर 23 जनवरी को उत्तर प्रदेश के सभी शहरों में मानव श्रृंखला बनाकर विश्व रिकॉर्ड बनाने की योजना है। इस कार्यक्रम में आठवीं क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बड़े स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। जिसमें स्कूली बच्चों के साथ ही पुलिस और प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
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