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Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2023: जयंती पर पढ़ें सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ी पांच रोचक बातें

Mon, 23 Jan 2023 09:38 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुभाष चंद्र बोस जयंती - फोटो : amar ujala
Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2023 : भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती हर साल 23 जनवरी को मनाई जाती है। इस साल भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस का पर्व 24 जनवरी के बजाए 23 जनवरी से मनाने का फैसला लिया है। अब से हर साल सुभाष चंद्र बोस की जयंती से गणतंत्र दिवस पर्व का आगाज होगा। भारत सरकार का यह निर्णय नेताजी के सम्मान और देश की स्वतंत्रता में उनके संघर्षों को याद रखने के लिए लिया गया है। इस साल भारत सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती मना रहा है। सुभाष चंद्र बोस एक वीर सैनिक, योद्धा, महान सेनापति और कुशल राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए आजाद हिंद फौज के गठन से लेकर हर भारतीय को आजादी का महत्व समझाने तक हर काम को किया। वह केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के लिए प्रेरणा हैं। 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' ये वह नारा है जिसने हर भारतवासी के खून को गरम कर दिया। अंग्रेजों से लड़ने के लिए एक ऐसी ताकत दी, जिसे हम देशभक्ति का नाम दे सकते हैं। लेकिन भारत के इस महान नेता के बारे में आप कितना जानते हैं? सुभाष चंद्र बोस के बारे में कई ऐसी बातें हैं, जिसे जानकर आप हर भारतीय गर्व करेगा। चलिए जानते हैं सुभाष चंद्र बोस की जयंती के मौके पर उनसे जुड़ी रोचक बातें।
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सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Netaji Research Bureau
सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म ओडिशा के कटक में 23 जनवरी 1897 को हुआ था। एक संपन्न बंगाली परिवार से ताल्लुक रखने वाले बोस के सात भाई और छह बहनें थीं। पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता प्रभावती देवी थीं। शुरुआती शिक्षा कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल से पूरी करने के बाद 1913 में कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया। 1915 में इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्य करने का लक्ष्य बनाया और तैयारी के लिए इंग्लैंड के कैंब्रिज विश्वविद्यालय चले गए।
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प्रशासनिक सेवा में सफलता - फोटो : Netaji Research Bureau
प्रशासनिक सेवा में सफलता

अंग्रेजों के शासन में एक भारतीय के लिए प्रशासनिक सेवा में शामिल होना कोई आसान काम नहीं था। लेकिन नेताजी ने भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास ही नहीं की, बल्कि चौथा स्थान भी हासिल किया। हालांकि बाद में पद छोड़कर स्वदेश वापस लौट आए और आजादी की जंग में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ज्वाइन कर ली।

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नेताजी और महात्मा गांधी - फोटो : Netaji Research Bureau
नेताजी और महात्मा गांधी

कहा जाता है कि महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार कभी नहीं मिले। दोनों की मंशा भारत की आजादी ही थी लेकिन इस आजादी को हासिल करने के लिए मार्ग और विचार अलग थे। गांधी जी उदार दल के नेता थे तो वहीं बोस क्रांतिकारी दल का नेतृत्व करते थे। हालांकि पहली बार गांधी जी को भारत का राष्ट्र पिता नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ही कहा था। उसके बाद महात्मा गांधी राष्ट्रपिता बन गए।
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सुभाष चंद्र बोस का परिवार - फोटो : Netaji Research Bureau
सुभाष चंद्र बोस का परिवार

सुभाष चंद्र बोस 1938 में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष निर्वाचिच हुए। एक साल बाद हुए कांग्रेस अधिवेशन में गांधी जी के समर्थन में खड़े पट्टाभि सीतारमैया को हरा दिया। हालांकि जब गांधी जी के साथ उनके मनमुटाव बढ़े तो नेताजी ने खुद से पार्टी छोड़ दी और अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम तेज कर दी। इस बीच उनकी शादी सेक्रेटरी एमिली से हुई, जो कि ऑस्ट्रियन मूल की थीं। नेता जी और एमिली की बेटी का नाम अनीता है, जो जर्मनी में अपने परिवार के साथ रहती हैं।
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सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य - फोटो : Netaji Research Bureau
सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य

भारत को आजादी दिलाने के लिए नेताजी ने आजाद हिंद सरकार और आजाद हिंद फौज का गठन किया। उन्होंने एक बैंक भी स्थापित किया, जिसे दस देशों बर्मा, क्रोसिया, जर्मनी, नानकिंग (वर्तमान चीन), इटली, थाईलैंड, मंचूको, फिलीपींस और आयरलैंड ने मान्यता दी। नेताजी की ताकत बढ़ रही थी, लेकिन 18 18 अगस्त 1945 को अचानक सुभाष चंद्र बोस का निधन हो गया। नेताजी की मौत एक रहस्य है, क्योंकि जिस हवाई जहाज से वह यात्रा कर रहे थे, वह रास्ते से ही लापता हो गया था। आज तक किसी को पता भी नहीं चल सका कि सुभाष चंद्र बोस का हवाई जहाज कहां गया और क्या वाकई उनकी निधन हो गया था।
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