अमेरिका में रहते वक्त उन पर 35 आरोप लगे, जिसमें जालसाजी, अमेरिका की नागरिकता पाने के उद्देश्य से अपने अनुयायियों को वहां शादी के लिए प्रेरित करना शामिल हैं। उन्हें इसके एवज में 4 लाख अमेरिकी डॉलर की सजा भुगती पड़ी। इसके साथ ही 5 साल तक देश न वापस आने की हिदायत के साथ उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ा।
अमेरिका से जब आचार्य रजनीश जब लौटे तो वे दोबारा पुणे आ गए। यहां आकर उन्होंने 'ओशो' नाम ग्रहण किया। हालांकि उन्होने काठमांडू और ग्रीस की यात्रा की, लेकिन किसी भी देश ने उन्हें रहने की इजाजत नहीं दी। साल 1986 में ओशो पुणे में ही बस गए। 19 जनवरी 1990 को ओशो रजनीश की दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो गई।