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जन्मदिन विशेष आचार्य रजनीशः यौन संबंधों और संभोग को लेकर ये विचार थे ओशो के

Wed, 11 Dec 2019 12:27 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य रजनीश चंद्र मोहन 'ओशो' (File Photo)
19वी सदी में पूरी भारतीय परंपरा और दर्शन के उलट आध्यात्म और जीवन के प्रति अपने सबसे क्रांतिकारी और विद्रोही विचारों वाले आचार्य रजनीश यानी की ओशो का आज जन्मदिन है। आज यदि ओशो जीवित होते तो उनकी उम्र तकरीबन 88 साल होती। कम उम्र में ही जीवन से विदा लेने वाले ओशो अपने विचारों के साथ ही जीवन शैली को लेकर भी दुनिया में चर्चित रहे।
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ओशो का ना केवल जीवन बल्कि जीवन दर्शन भी बहुत ही विवादित रहा। विशेष रूप से उन्होंने त्याग की भावना के उलट संभोग के रास्ते ही आध्यात्म मार्ग की राह सुझाई। संभोग से समाधि पर दिए गए उनके प्रवचन जो किताब रूप में प्रकाशित भी हुए वह पूरी दुनिया में चर्चित हुए। आज भी ओशो का सारा दर्शन इसी मूल बिंदु के केंद्र में है। आइए जानते हैं क्या कहा था ओशो ने यौन संबंधों और समाधि को लेकर:

 
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Osho
ओशो ने सेक्स को ही समाधि तक पहुंचने की सीढ़ी बता दिया। उनकी विचारधारा समाज को चुनौती देती है। जो लोग ओशो के बारे में ज्यादा नहीं जानते उनके लिए ओशो का नाम दुनियाभर के प्रसिद्ध बाबाओं और गुरुओं में से ही एक हैं। उनके लिए ओशो की पहचान एक ऐसी विवादित शख्सियत की है, जिन्होंने हमेशा बेरोकटोक जीवन और मुक्त सेक्स जैसी बातों का समर्थन किया।

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ओशो कहते हैं कि प्रेम का प्राथमिक बिंदु सेक्स ही है और जो लोग सेक्स को घृणा के नजरिए से देखते हैं, वे कभी प्रेम कर ही नहीं सकते। ओशो के मुताबिक संभोग और समाधि के बीच एक सेतु है, एक यात्रा है, एक मार्ग है। समाधि जिसका अंतिम छोर है और संभोग उस सीढ़ी का पहला सोपान है।
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osho
ओशो ने कहा है कि हमने सेक्स को सिवाय गाली के आज तक दूसरा कोई सम्मान नहीं दिया। हम सेक्स की बात करते वक्त भी भयभीत होते हैं। लेकिन सच तो ये है कि मनुष्य के जीवन में इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ है ही नहीं।
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osho
ओशो समाज के युवाओं को सेक्स के संबंध में चेताते हुए कहते हैं कि हजारों साल से पीढ़ियां सेक्स से भयभीत रही हैं। तुम भयभीत मत रहना। तुम समझने की कोशिश करना उसे। तुम बात करना। तुम सेक्स के संबंध में जो आधुनिक खोजे हुई हैं उनके बारे में पढ़ना। चर्चा करना और समझने की कोशिश करना।
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Osho
ओशो सेक्स को जहां थकान वाला बताते हैं वहीं उसकी सबसे ज्यादा महत्व की भी बात करते हैं। उनके मुताबिक सेक्स थकान लाता है। इसकी अवहेलना मत करना। जबतक तुम इसके पागलपन को नहीं जान लेते, तुम इससे छुटकारा नहीं पा सकते।

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ओशो
प्रेम की सारी यात्रा का प्राथमिक बिंदु काम है, सेक्स है। सेक्स की शक्ति ही प्रेम बनती है। सेक्स ऊर्जा का अधोगमन है, नीचे की तरफ बह जाना है, ब्रह्माचर्य ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन है, ऊपर की तरफ उठ जाना है। जिस दिन इस देश में सेक्स की सहज स्वीकृति हो जाएगी, उस दिन इतनी बड़ी ऊर्जा मुक्त होगी भारत में कि हम आइंस्टीन पैदा कर सकते हैं।

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ओशो
ओशो परिवार नियोजन के पक्षधर हैं। वो कहते हैं कि परिवार नियोजन की बात धीरे-धीरे अनिवार्य हो जानी चाहिए। इसे किसी की स्वेच्छा पर नहीं छोड़ा जा सकता।
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ओशो
वहीं, पति पत्नी के रिश्तों को मंदिर से जोड़ते हैं वो कहते हैं कि पति अपनी पत्नी के पास इस तरह से जाए जैसे कोई मंदिर के पास जाता है, पत्नी अपने पति के पास ऐसे जाए जैसे कोई परमात्मा के पास जाता है क्योंकि जब दो प्रेमी संभोग करते हैं, तो वास्तव में वे परमात्मा के मंदिर से ही गुजरते हैं।
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