असहोयग आंदोलन
ब्रिटिश सरकार द्वारा पास रौलट एक्ट के विरोध में 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के जलियांवाला बाग में एक सभा बुलाई गई जिसमें हजारों की भीड़ जुटी थी। इसी दौरान ब्रिटिश जनरल डायर अपनी टुकड़ी के साथ पहुंच निहत्थे लोगों पर गोली चलाने का आदेश दे दिया। जिस कारण बहुत सारे मासूम बच्चे, महिलाएं और पुरुष मारे गए। इस क्रुरता की वजह से ब्रिटिश सरकार चौतरफा घिर गई। इसके विरोध में सन 1920 में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन की घोषणा कर दी। इस आंदोलन में सरकारी पदों का, स्कूल का, सरकारी अदालतों का बहिष्कार करना, विदेशी वस्तुओं का परित्याग करना शामिल था। इसी दौरान आंदोलनकारियों द्वारा चौरा चौरी नामक जगह पर एक हिंसक घटना का अंजाम दिया गया। अहिंसा के पूजारी गांधी जी ने इसी वजह से सन 1922 में असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया।