महात्मा गांधी
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सुभाष चंद्र बोस ने कहा था पहली बार राष्ट्रपिता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के बीच के मतभेदों की बात कही जाती है लेकिन सबसे पहली बार नेताजी ने ही 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो स्टेशन से दिए गए अपने भाषण में गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। नेताजी ने आजाद हिंद फौज की स्थापना करते हुए महात्मा गांधी से आशिर्वाद मांगा था।
अपने भाषण के अंत में सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि 'हमारे राष्ट्रपिता, भारत की आजादी की पवित्र लड़ाई में मैं आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की कामना कर रहा हूं।'
बाद में 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कर दी। अहिंसा का संदेश देने वाले इस महान विभूति के जीवन का अंत होने के बाद देशवासियों ने मन ही मन गांधीजी को राष्ट्रपिता मान लिया।