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एक नहीं कई जबरदस्त बीमारियों का इलाज है पॉपकॉर्न, कब्ज तो हो जाएगी छू मंतर

Tue, 08 Dec 2020 06:17 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पॉपकॉर्न खाने के कोई नुकसान नहीं हैं बल्कि लाभ ही लाभ हैं - फोटो : pixabay

घर में अक्सर हमें पॉपकॉर्न खाते देख घर के बड़े -बुजुर्ग कहते हैं ये भी भला कोई खाने की चीज है। पर सच तो यह है कि पॉपकॉर्न खाने के कोई नुकसान नहीं हैं बल्कि लाभ ही लाभ हैं। भूख लगने पर कुछ भी तला-गला खाने से बहुत बेहतर है कि पॉपकॉर्न खा लिए जाए। पॉपकॉर्न में किसी प्रकार की न ही शक्कर होती है न ही नमक इसलिए इसे कोई भी खा सकता है। यदि कोई इसमें ऊपर से मसाले, मक्खन आदि डालकर खाएं तो जरूर उसे कोई नुकसान पहुंच सकता है। लेकिन सादे पॉपकॉर्न खाने से तो शरीर को कई सारे पोषक तत्व एवं विटामिन मिलते हैं। अगली स्लाइड्स से जानिए पॉपकॉर्न खाने से होने वाले फायदों के बारे में।

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फाइबर से कब्ज में राहत मिलती है

कब्ज से मिलती है राहत
पॉपकॉर्न में मौजूद फाइबर से कब्ज में राहत मिलती है। इसलिए जब भी पाचन तंत्र संबंधी कोई समस्या हो तो पॉपकार्न का सेवन जरूर करें। पॉपकॉर्न में मौजूद बी- कॉम्प्लैक्स विटामिन, विटामिन-ई और मिनरल्स पाचन क्रिया को सुधारने में सहायता करते हैं और सबसे महत्वपूर्ण इसे कितनी भी मात्रा में खा लो, पेट संबंधी कोई समस्या नहीं होगी।

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एक कप पॉपकॉर्न में 30 कैलोरी होती है - फोटो : pixa

वजन कम करता है
यदि आप वजन कम करना चाह रहे हैं तो जब भी आपको भूख लगे कुछ और खाने की बजाय पॉपकॉर्न खाएं। एक कप पॉपकॉर्न में 30 कैलोरी होती है जो कि एक कप आलू की चिप्स की तुलना में 5 गुना कम होती है। इसमें मौजूद फाइबर आपकी भूख को मिटाने में भी सहायता करता है जिस वजह से बार-बार भूख भी नहीं लगती है। 

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पॉपकॉर्न में पॉलीफिनोल नामक एक तत्व होता है - फोटो : pixabay

कैंसर का खतरा करता है कम
नियमित रूप से पॉपकॉर्न खाने वालों को कैंसर होने का खतरा कम रहता है। पॉपकॉर्न में पॉलीफिनोल नामक एक तत्व होता है, जिससे कि कैंसर होने की संभावनाएं कम हो जाती है और ये ह्रदय को भी स्वस्थ रखता है। अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च का कहना है कि पॉलीफिनोल उस एंजाइम को ब्लॉक कर देता है जिससे कैंसर होने का खतरा रहता है।

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पॉपकार्न का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है - फोटो : Pixabay

ब्लड शुगर लेवल को रखता है नियंत्रित
पॉपकार्न का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है। किसी भी आहार के ग्लाइसेमिक इंडेक्स का यह आशय होता है कि उसके सेवन के बाद कितना ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। जिस आहार का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, उसके सेवन से ब्लड शुगर कम ही रहता है। वहीं अन्य कई सारी चीजों में यही ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है जिससे कि एकदम से ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है।

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