विवाह में रिश्ते का स्थाई होना इस बात पर भी निर्भर करता है कि दो लोग एक-दूसरे के लिए कितने समर्पित हैं। भारतीय समाज में परम्परागत रूप से इस समर्पण को भी करवाचौथ के त्यौहार के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। यह केवल आज का ही दौर नहीं है, वर्षों से कई दम्पत्ति ऐसे हैं जहाँ पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के लिए करवाचौथ का व्रत रखते हैं या फिर पति इस ख़ास दिन अपनी पत्नियों का ख़ास ख्याल रखते हैं। यह एक-दूसरे के प्रति प्रेम और समर्पण को ही दर्शाता है। करवाचौथ का असली उद्देश्य दाम्पत्य जीवन को मजबूती से जोड़े रखने का होता है।
करवाचौथ का भाव मन के रिश्ते से जुड़ा होता है। जहाँ एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव होता है, वहां करवाचौथ सार्थक हो जाता है। इस व्रत की पूर्णता ही इस भाव में है। आपसी प्रेम, समझ और भरोसा दाम्पत्य जीवन की नींव हैं और इस नींव को दृढ़ बनाता है, करवाचौथ। इस करवाचौथ पति-पत्नी किसी के भी रूप में आप दे सकते हैं अपने हमसफ़र को 4 प्रॉमिस या वचनों का उपहार, जो आपके रिश्ते को बनाएगा और भी खूबसूरत और सदाबहार। जानिए क्या हैं ये 4 प्रॉमिस।