विनेश फोगाट
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जब टूटा ओलंपिक का सपना
वो बताती हैं, "जब तक पिताजी जिंदा थे, सब कुछ ठीक था। वो मुझे खेलते देख बहुत खुश होते थे लेकिन उनकी मौत के बाद सब कुछ बदल गया। गांव के लोग मम्मी को बोलने लगे कि बिन पिता की बेटी है, उसकी शादी करवा दो, बस। गीता-बबीता तो इसलिए खेल रही हैं क्योंकि उनके पिता हैं। गांव में किसी को नहीं लगता था कि मैं कुछ कर पाऊंगी। लेकिन मम्मी ने साफ कह दिया कि मेरी बेटी खेलेगी। हालात अच्छे नहीं थे लेकिन हमें सुविधाएं देने के लिए मां ने बहुत संघर्ष किया।"
विनेश ने बताया, "ताऊजी की ट्रेनिंग बहुत की मुश्किल होती थी। कई बार सोचती थी, सब छोड़ दूं लेकिन जब मम्मी को मेहनत करते हुए देखती थी तो मैंने भी अपने आप को अंदर से मजूबत करना सीख लिया।" कॉमनवेल्थ के बाद जब 2016 रियो ओलंपिक में भारतीय टीम गई तो 21 साल की विनेश से पदक पक्का माना जा रहा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। क्वार्टरफाइनल में अचानक विनेश को गंभीर चोट लग गई। देखते-देखते गेम बदल गया। दर्द से कराहती विनेश को स्ट्रेचर पर ले जाना पड़ा और ओलंपिक का सपना टूट गया।