फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम की बात: आखिर ट्रेन में कितने तरह के होते हैं डिब्बे, जान लेंगे तो टिकट लेने के बाद नहीं होगी कभी दिक्कत

Fri, 24 Sep 2021 10:06 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अक्सर ट्रेनों में सफर करने वाले लोगों को इसके बारे में जरूर पता होना चाहिए कि ट्रेन में कितने तरह के डिब्बे होते हैं। वैसे तो बहुत सारे लोगों को ये सब पता ही होता है, लेकिन जो लोग नहीं जानते हैं, उनको यह जरूर जानना चाहिए। आपने देखा होगा कि ट्रेन के डिब्बों पर 2S, 3S, CC और EC जैसे कोड लिखे होते हैं। क्या आप ये जानते हैं कि इनका मतलब क्या होता है? शायद नहीं जानते होंगे। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि एसी से लेकर जनरल तक, ट्रेन में आखिर कितने तरह के डिब्बे होते हैं। 

शुरुआत करते हैं एसी फर्स्ट क्लास से। इसका किराया हवाई यात्रा के किराये जितना ही महंगा होता है। सुविधाओं की अगर बात करें तो इस डिब्बे में शानदार पर्सनल रूम जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा एसी टू-टियर और एसी थ्री-टियर होता है। एसी टू-टियर का किराया और सुविधाएं फर्स्ट क्लास एसी के मुकाबले कम होती हैं और एसी थ्री-टियर का किराया टू-टियर के मुकाबले कम होता है। इनमें कॉमन ये है कि सभी कोच एसी वाले होते हैं। 
विज्ञापन

2 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
3E एसी  थ्री-टियर (इकोनॉमी) एयर कंडीशन कोच होते हैं। ऐसे कोच में स्लीपिंग बर्थ तो होते हैं, लेकिन रीडिंग लाइट्स जैसी सुविधाएं नहीं होती हैं। इसके अलावा अगर एग्जिक्यूटिव चेयर कार कोच की बात करें तो ये एसी वाले कोच तो होते हैं, लेकिन इसमें सिर्फ बैठने के लिए ही सीटें होती हैं, आप सो नहीं सकते हैं। इसलिए दिन के सफर के लिए इसे एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है। 
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
CC एसी चेयर कार कोच में भी सिर्फ बैठने के लिए ही सीटें होती हैं। इस कोच को एसी डबल डेक सीटर भी कहा जाता है। अब आता है SL यानी स्लीपर क्लास। देश में सबसे ज्यादा लोग इसी कोच में सफर करते हैं। इसमें हरेक कोच में 72 यात्रियों के सोने की व्यवस्था होती है। ऐसे कोच में एयर कंडीशन की सुविधा नहीं होती है। 

4 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
2S यानी सेकेंड सीटर की अगर बात करें तो ये कोच चेयर कार की तरह ही होते हैं, लेकिन इसमें एसी की व्यवस्था नहीं होती है। इन्हें नॉन एसी डबल डेक सीटर भी कहा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
इसके बाद आता है जनरल कोच (UR/GEN), जिसका किराया सबसे कम होता है। इसमें यात्रियों के लिए सीटें तय नहीं होती हैं, यानी कोई भी यात्री कहीं भी बैठ सकता है। हालांकि इस कोच की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसमें भीड़ बहुत होती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें