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Independence Day 2021: आखिर क्यों गांधी जी नहीं पहुंचे थे स्वतंत्रता दिवस के जश्न में? यहां जानें वजह

Sun, 15 Aug 2021 12:03 AM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महात्मा गांधी - फोटो : iStock
15 अगस्त का दिन पूरे भारत देश के लिए गर्व महसूस करने का दिन है, क्योंकि इस दिन हमारे देश के लाखों अमर सपूतों ने अपनी जान की परवाह किए बिना इस देश को आजाद कराने में अपनी जान की बाजी लगा दी। कई सालों तक अंग्रेजों की गुलामी में हमारा देश रहा, जिस दौरान उन्होंने भारतीय लोगों पर काफी अत्याचार किए। इस दौरान लोगों को कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था, और जिंदगी आज की तरह नहीं थी। ऐसे में कई सपूतों ने देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई, जिसमें से एक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी शामिल थे। गांधी जी ने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए अंग्रेजों को अपने आगे झुका दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब देश आजाद हुआ तो आजादी के जश्न में महात्मा गांधी शामिल नहीं हुए थे? शायद नहीं, तो चलिए आपको इसके पीछे की वजह बताते हैं।
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शिमला में महात्मा गांधी(फाइल) - फोटो : अमर उजाला
बिना गोली-बंदूक के लड़े गांधी जी
  • दरअसल, महात्मा गांधी ने भारत देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने बिना गोली-बंदूक के एक डंडे के दम पर और अहिंसा के रास्ते को चुनकर अंग्रेजों को हरा दिया। आजादी की इस लड़ाई में गांधी जी जेल भी गए और अंग्रेजों ने उन्हें डराने की भी कोशिश की, लेकिन वे इन सबसे न ही डरे और न ही पीछे हटे। बल्कि उन्होंने अहिसा के रास्ते पर चलना नहीं छोड़ा।
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महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
इसलिए शामिल नहीं हुए थे आजादी के जश्न में
  • भले ही महात्मा गांधी का देश को आजाद कराने में योगदान रहा, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ, तो वे इसे जश्न में शामिल नही हुए थे। दरअसल, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस दिन महात्मा गांधी पश्चिम बंगाल के नोआखली में अनशन पर बैठे थे। 

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महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Facebook/CMO Rajasthan
इसलिए बैठे थे अनशन पर
  • सभी चाहते थे कि महात्मा गांधी आजादी के इस जश्न में शिरकत करें, लेकिन पश्चिम बंगाल के नोआखली में हिंदूओं और मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक हिंसा हो रही थी। वहीं, महात्मा गाधी इसी सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए अनशन पर बैठे हुए थे। इसी वजह से वे 15 अगस्त 1947 को आजादी के जश्न में शामिल नहीं हो पाए थे।
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महात्मा गांधी की मूर्ति (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Facebook/German Consulate General Bengaluru
लाल किले पर नहीं फहराया गया था तिरंगा
  • यहां आपको ये भी बता दें कि 15 अगस्त 1947 को लाल किले पर तिरंगा नहीं फहराया गया था। लोकसभा सचिवालय के एक शोध के मुताबिक, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 16 अगस्त 1947 को लाल किले से तिरंगा फहराया था यानी आजादी के अगले दिन। हालांकि, मौजूदा समय में हर साल 15 अगस्त को ही देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराते हैं।
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