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'परिवार की अन्नपूर्णा' क्या खुद के लिए बनाती हैं खाना? जानिए एकल महिलाओं के लिए भोजन पकाना क्यों जरूरी

Tue, 29 Aug 2023 04:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Cooking Food - फोटो : istock
अलका ‘सोनी’

Health Tips For Women Living Alone: घर और बाहर की जिम्मेदारियां निभाते हुए अक्सर महिलाएं अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं। अकेली हैं तो घर पर खाना बनाने से बचती हैं। कई बार थकान भी इसकी वजह होती है। लेकिन हर रोज की यह लापरवाही सेहत को बिगाड़ सकती है। बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को ज्यादा पोषण की जरूरत होती है।

आज के दौर में महिलाओं के गुणों, स्वभाव और जीवन-शैली में ढेर सारे बदलाव आए हैं। इनमें से एक बड़ा बदलाव, जो आजकल खासतौर से देखने को मिल रहा है, वह यह है कि महिलाएं नौकरी अथवा पढ़ाई के लिए या फिर कुछ अन्य कारणों से अकेली रह रही हैं। वे भी पुरुषों की तरह भागते हुए ऑफिस जा रही हैं। यह बदलाव काफी सुखद है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जब पुरुष बाहर जाते हैं तो महिलाएं उनके लिए भोजन आदि की व्यवस्था करती हैं। लेकिन जब महिला बाहर निकलती है तो उसके लिए कोई नहीं होता, जो उससे यह भी पूछे कि तुमने खाया या नहीं?

वैसे भी कुकिंग को एक तरह से महिलाओं के हिस्से में डाल दिया गया। शायद इसीलिए पहले स्त्रियों के गुणों में पाक कला की निपुणता थी, मगर आज उनकी प्राथमिकता बदल गई है। जाहिर-सी बात है कि इससे लड़कियों का पाक कला के प्रति रुझान भी बदल रहा है। इसके बावजूद जब कोई महिला परिवार के साथ रहती है तो सबकी पसंद के हिसाब से भोजन बनाती है और खुद भी वही खा लेती है। लेकिन समस्या तब आती है, जब वह अकेली रहती है। इसके अलावा हर समय घर और बाहर का काम करते-करते महिलाएं इतनी ऊब जाती हैं कि मौका हो, तब भी वे अपनी पसंद का खाना नहीं बनाना चाहती हैं।
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cooking - फोटो : istock
पश्चिम बंगाल के आसनसोल की पैंतालीस वर्षीया सुनंदा बच्चों के पढ़ाई के लिए बाहर चले जाने के बाद प्राय: अकेले खाना खाती हैं। वह कहती हैं, “पति की जॉब ऐसी है कि वह घर पर ज्यादा नहीं रहते। मैं भी अपने काम से दिन भर बाहर रहती हूं। ऐसे में खिचड़ी खाकर काम चला लेती हूं और कभी-कभी तो मैगी ही।”

आज महिलाओं का एकल रहना आम होता जा रहा है। वे अपनी जॉब तो पूरी ईमानदारी से करती हैं, मगर पीछे छूट जाती है खुद से खाना बनाकर खाने की आदत। इसके कारण वे आधा वक्त बाहर से खाकर काम चलाती हैं तो कई बार आधा वक्त भूखी ही रहती हैं, मगर खुद खाना नहीं बनातीं। पेशे से शिक्षिका बर्नपुर की रजनी पैंतीस साल की ही हैं, मगर तलाकशुदा हैं। उनका कहना है, “मैं पहले खाना बनाती थी, मगर अकेले के लिए क्या बनाऊं? बाहर से मंगाती हूं और खाती हूं। कोई परेशानी नहीं होती। मेरा काम चल ही जाता है।”

सबके लिए अन्नपूर्णा बन जाने वाली स्त्री अगर स्वयं के लिए कुछ नहीं बना रही है तो इसके कारण जानने की जरूरत है, क्योंकि रोज-रोज की लापरवाही उसके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है। इस उम्र में उसके शरीर में हो रहे हार्मोनल बदलाव अत्यधिक देखभाल की मांग करते हैं।
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ge - फोटो : getty images
सबसे पहले सेहत का ख्याल

सबसे पहले आप सप्ताह भर का मेन्यू बनाकर रखें और उसके अनुसार ही भोजन बनाएं। इससे कई लाभ मिलेंगे। मसलन, समय पर सही ताजा भोजन मिलेगा। खालीपन दूर होगा। पैसे की बचत होगी और सबसे जरूरी आपको अपना जीवन सजीव लगेगा। इसलिए अकेली रहने वाली महिलाओं को चाहिए कि वे अपना भोजन रोज और स्वयं बनाएं। अगर नहीं बनाती हैं तो इसकी आदत डालें और जीवन को पूर्णता एवं सजीवता के साथ जीएं। एकल होना जीवन में आ रही परिस्थितियों का एक हिस्सा है। यह अभिशाप नहीं है। इसलिए एकल होकर भी आप खुलकर जीएं।

अकेले के लिए कौन पकाए

अकेली महिला को जीवन में कहीं न कहीं एक बात कचोटती रहती है कि वह अकेले जीवन जी नहीं रही, बल्कि काट रही है। इस वजह से उसके मन से पहली आवाज यही आती है कि वह खाना क्यों और किसके लिए बनाए? दूसरे, कोई साथ हो, तभी खाना बनाना अच्छा लगता है और जरूरी भी। अकेले के लिए कौन बनाए? यह बात दिमाग में आते ही महिला किचन से नाता तोड़ देती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
थकान का क्या करें

कई बार ऐसा भी होता है कि अकेले इंसान को ढेर सारे काम निपटाने पड़ते हैं। एकल महिला होने के कारण दिन भर की भाग-दौड़ करने के बाद वह बहुत अधिक थक जाती है। उसके पास थकावट के कारण इतनी हिम्मत नहीं बचती कि रसोई की ओर देखे भी, जिसके कारण वह कुछ हेल्दी बनाना छोड़कर बाजार से रेडीमेड मंगवाकर खा लेती है।

अहम आता है आड़े

एक अन्य महत्वपूर्ण बात, जो महिलाओं को परेशान करती है। उनके मन में कभी-कभी यह भावना भी आ जाती है कि जब वे पुरुषों की तरह कमा रही हैं तो भला कुकिंग क्यों करें। उन्हें भी ठाट से रहने का अधिकार है। इस मानसिकता के कारण भी वे किचन से दूर हो जाती हैं, जबकि खाने से स्त्री या पुरुष होने का कोई संबंध नहीं है। अस्वास्थ्यकर भोजन किसी को भी बीमार कर सकता है।

समय की कमी

एकल महिला के पास समय की कमी भी एक मुख्य कारण होती है। इसके कारण वह खाना बनाने के झंझट से भागती है, क्योंकि जितनी देर में सब्जी लाएगी, ग्रॉसरी जमा करेगी, खाना बनाएगी, उतनी देर में वह अपना कोई जरूरी काम पूरा कर लेगी। समय सीमा में बंधी स्त्री मजबूरीवश भी भोजन बनाना छोड़ देती है।
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डायबिटीज में क्या खाना चाहिए? - फोटो : istock
ये वे मुख्य कारण हैं, जिनके चलते अकेले रहने वाली महिला अपने लिए खाना नहीं बनाना चाहती। लेकिन सेहत के नजरिए से कुछ ऐसी बातें हैं, जिनको ध्यान में रखते हुए एकल महिलाओं को अपने लिए खाना बनाना चाहिए।

हेल्थ इज वेल्थ

कहावत है, ‘हेल्थ इज वेल्थ’, यानी सेहत से बढ़कर कुछ नहीं। अगर आप सेहतमंद हैं, तभी कुछ कर पाएंगी। इसके लिए जरूरी है कि आप घर का बना खाएं, क्योंकि घर में बना खाना जितना शुद्ध होता है, उतना बाहर का खाना नहीं होता। घर के खाने में जहां कम घी, तेल, मिर्च-मसालों को वरीयता दी जाती है, वहीं बाहर के खाने में इसका उल्टा होता है, यानी चिकनाई और मिर्च-मसालों की भरमार। इसलिए अपना खाना स्वयं बनाएं और सेहतमंद रहें।

पैसों की भी सोचें

आज आसमान छूती महंगाई में जहां जीवन की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो चला है, ऐसी स्थिति में अगर रोज बाहर का खाना खाएंगी तो हेल्थ और वेल्थ, दोनों बिगड़ सकती हैं। एकल महिला घर पर स्वयं ही खाना बनाएगी तो पूंजी की बड़ी मात्रा में बचत हो सकती है। बाहर के खाने का वैसे भी भरोसा नहीं कि उसकी क्वालिटी क्या होगी, जिसका नतीजा अक्सर खराब सेहत के रूप में सामने आता है।

बोरियत होगी कम

अकेले रहते हुए कभी-कभी आप बहुत बोरिंग फील करने लगती हैं। अकेले रहने वालों की अक्सर यह शिकायत होती है कि खाली वक्त को कैसे मैनेज करें? तो इसके लिए जब भी आपको लगे कि आप खालीपन के कारण बोर हो रही हैं तो रसोई में जाकर, अपने लिए कोई मनपसंद पकवान बनाकर मजे से खाएं और अपने खालीपन का सदुपयोग करें।
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Cooking Food - फोटो : istock
दोस्तों को बुलाएं

हमेशा अकेले भोजन करते हुए अगर मन ऊब गया हो तो अपने कुछ दोस्तों को खाने पर बुला लें। एक अच्छी मेजबान बनकर उनकी पसंद का कोई व्यंजन बनाएं। चाहें तो उन्हें भी इस काम में हाथ बंटाने का अवसर दें। इससे माहौल खुशनुमा हो जाएगा। जीवन की एकरसता टूटेगी।

सामंजस्य है जरूरी

एकल रहना किसी भी महिला के लिए आसान कार्य नहीं होता। कई बार वह मजबूरी में एकल रहती है तो कभी परिस्थितिवश। ऐसे हालात में एकल युवती को चाहिए कि वह स्थिति को समझे और दिल-दिमाग से एकल शब्द को निकालकर अपना खाना स्वयं बनाए और खाए। मनोचिकित्सकों के अनुसार, आज के दौर में तमाम युवतियों की यही समस्या है कि वे अपने लिए सोचना ही नहीं चाहती हैं।

थाली में हों बीज भी

पोषण विशेषज्ञ पूनम सिंघल के मुताबिक, एक महिला जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक कई तरह के हार्मोनल परिवर्तनों से गुजरती है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखने की जरूरत अधिक होती है। महिलाएं परिवार के सभी सदस्यों का ध्यान रखती हैं। हर रीति-रिवाज के अनुसार खाना बनाती हैं, लेकिन अपनी बारी आते ही जो बचा, उसी से काम चला लेती हैं। अगर पति और बच्चों के साथ रहती हैं तो कुछ बना भी लेती हैं। अकेले में तो बस चाय-टोस्ट, पैक्ड फूड या बाहर के खाने पर ही निर्भर होकर रह जाती हैं, जबकि बढ़ती उम्र के साथ उन्हें अधिक पोषण की आवश्यकता होती है। ऐसे में उन्हें अपने भोजन में विभिन्न प्रकार के बीजों को भी शामिल करना चाहिए, जैसे कि चिया, अलसी, सूरजमुखी, तरबूज और कद्दू के बीज। पर्याप्त पानी पीना चाहिए। विटामिन ए, बी, सी, डी और कैल्शियम के लिए दूध, दही, रागी, पत्तेदार सब्जियां एवं सलाद को भी भोजन में शामिल करना चाहिए। आखिर एक स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार का निर्माण कर सकती है।
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