प्रकृति ने जितने रंग हमारे आस-पास बिखेरे हैं, उनका एक बहुत ही सुंदर स्वरूप हमारे तीज-त्योहारों में भी देखने को मिलता है। साल भर में उत्सव और उल्लास मानाने के लिए हमारे पास अनगिनत तीज-त्यौहार हैं और हर तीज-त्यौहार की अपनी कुछ न कुछ खासियत है। हिन्दू शास्त्रों और पुराणों के अनुसार इनके साथ कोई न कोई ठोस वजह जुडी हुई है। खास बात यह है कि ज्यादातर त्यौहार कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में प्रकृति से जुड़ते हैं और यही हमारे और प्रकृति के बीच का परस्पर सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी है।
हरियाली अमवस्या, श्रावण माह में आने वाली अमावस्या है, जब पेड़-पौधे, जीव-जंतु सभी सुख की वर्षा में नहा रहे होते हैं। यूं अमावस्या का मूल उद्देश्य हमारे पुरखों के प्रति सम्मान दर्शाना है। इसलिए ही अधिकांशतः अमावस्या के रोज पूर्वजों के लिए धूप करना, नदी में स्नान करना और दान करने जैसे आयोजन किये जाते हैं। लेकिन हरियाली अमावस्या अपने नाम के अनुरूप प्रकृति के और भी करीब हो जाती है।