स्वर्ण मंदिर में चार दरवाजे हैं
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भूखे को खाना जरूर खिलाओ
लंगर की शुरुआत के बारे में यह माना जाता है कि लंगर नानक जी के घर पर ही शुरू हो गया था, जिसे आने वाले गुरुओं ने भी जारी रखा। वे कहते थे कि चाहे अमीर हो या गरीब, ऊंची जाति का हो या नीची जाति, अगर वह भूखा है तो उसे खाना जरूर खिलाओ। इसलिए स्वर्ण मंदिर में चार दरवाजे हैं। जो यही संदेश देते हैं कि व्यक्ति कोई भी हो, उनके लिए चारों दरवाजे खुले हैं।