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XE Varient: बच्चों में बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले, जानिए किस तरह के लक्षण आ रहे हैं सामने, कैसे करें बचाव?

Sat, 23 Apr 2022 01:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : istock
हाल ही में सामने आया कोरोना का एक्सई वैरिएंट, दुनियाभर के लिए बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। अध्ययनों में इस वैरिएंट की प्रकृति जिस तरह की संक्रामकता वाली बताई जाती है, वह निश्चित ही डराने वाली है। प्रारंभिक शोध बताते हैं कि नया एक्सई वैरिएंट, अब तक के सबसे संक्रामक माने जा रहे कोरोना के ओमिक्रॉन BA.2 से भी अधिक तेजी से लोगों में संक्रमण का कारण बन सकता है। जिस गति से यह दुनिया के कई देशों में फैल रहा है उसको लेकर हाल में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में लोगों को अलर्ट भी किया है। वैश्विक रिपोर्ट इस ओर भी इशारा करती हैं कि यह वैरिएंट बच्चों को संभवत: अधिक शिकार बना रहा है।

भारत के संदर्भ में बात करें तो दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में बच्चों में तेजी से कोरोना संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन और चीन जैसे देश, जहां एक्सई वैरिएंट ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं, वहां भी बच्चों को अधिक संक्रमित पाया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि बच्चों का अभी तक वैक्सीनेशन नहीं हो पाया है ऐसे में सभी लोगों को और भी सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं कि बच्चों में किस तरह के लक्षण अधिक देखे जा रहे हैं और इससे बचाव के लिए क्या किए जाने चाहिए? 
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नए कोरोना वैरिएंट्स से बच्चों को खतरा - फोटो : iStock
एक्सई वैरिएंट से बच्चों को खतरा

एक्सई वैरिएंट को लेकर दुनियाभर से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि वयस्कों के साथ एक्सई वैरिएंट का खतरा बच्चों में भी अधिक देखा जा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि बच्चों में ज्यादातर मामले हल्के लक्षणों वाले ही रिपोर्ट किए जा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना वायरस, शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। अब तक बच्चों का टीकाकरण न हो पाना बड़ी चिंता का विषय है।
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बच्चों में कोरोना के हल्के लक्षण (सांकेतिक) - फोटो : istock
किस तरह के लक्षण सामने आए हैं?

एक्सई वैरिएंट से बच्चों में संक्रमण को लेकर आई रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ज्यादातर बच्चों में हल्के लक्षण ही हैं जो आसानी से ठीक हो जा रहे हैं। अब तक रिपोर्ट किए गए सामान्य लक्षणों में बुखार, नाक बहना, खांसी, शरीर में सामान्य दर्द, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द जैसी समस्याएं देखी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेष कहते हैं, गंभीर लक्षण सिर्फ उन्हीं बच्चों में देखे जा रहे हैं जो पहले से ही अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार हैं। बच्चों में लक्षणों को लेकर माता-पिता के लगातार ध्यान देते रहना चाहिए।

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बच्चों का टीकाकरण जरूरी - फोटो : istock
कोमोरबिडिटी वाले बच्चों का टीकाकरण बहुत जरूरी

देश में कोविड-19 के बढ़ते मामले, विशेषकर बच्चों में संक्रमण के जोखिम को देखते हुए भारत के प्रमुख बायोमेडिकल वैज्ञानिक डॉ गगनदीप कांग ने कोमोरबिडिटी वाले बच्चों के जल्द से जल्द टीकाकरण पर जोर दिया है। जिस तरह से नए वैरिएंट्स की संक्रामता दर देखी जा रही है, उससे बच्चों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। इस बात को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त डेटा नहीं हैं कि देश में एक्सई वैरिएंट से बच्चों में संक्रामकता की दर कैसी है, हालांकि हमें पहले से ही इसको लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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वैक्सीनेशन पर जोर - फोटो : iStock
देश में बच्चों का टीकाकरण

देश में फिलहाल 12 साल से ऊपर के बच्चों को कोविड वैक्सीन देने को मंजूरी मिली है। भारत में 12-18 साल तक के बच्चों और किशोरों के लिए कॉर्बेवैक्स, कोवाक्सिन और जाइकोब-डी वैक्सीन को उपयोग में लाने को मंजूरी मिल चुकी है, हालांकि देश में अब भी बच्चों के टीकाकरण की रफ्तार काफी कम है। जिस तरह से हाल ही में कम आयु के लोगों में संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, वह विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाने वाले हैं।
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बच्चों को कोरोना से बचाएं - फोटो : पिक्साबे
बच्चों में संक्रमण के खतरे को लेकर क्या कहते हैं अध्ययन?

ओमिक्रॉन वैरिएंट से बच्चों में संक्रमण और गंभीरता के जोखिम को लेकर जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि 5 साल से कम आयु वाले बच्चों में डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमण की स्थिति में गंभीरता का खतरा कम होता है।  इस वैरिएंट से कुछ विशेष स्थितियों को छोड़कर बच्चों में गंभीर संक्रमण का जोखिम बहुत कम पाया गया है।

हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि डेल्टा की तुलना में ओमिक्रॉन की संक्रामता दर 6-8 गुना अधिक हो सकती है, जिसको लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बच्चों में कोविड-19 संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में अभी भी ज्यादा ज्ञात नहीं है लेकिन यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला किसी दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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