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World Sight Day 2025: डायबिटीज रोगियों में क्यों बढ़ जाता है अंधेपन का खतरा? शुरुआती लक्षणों को न करें इग्नोर

Thu, 09 Oct 2025 09:24 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Blindness in Diabetes: डायबिटीज के मरीजों में अक्सर देखने को मिलता है कि उन्हें आंखों से संबंधित समस्या अधिक होती हैं। असल में शरीर में ब्लड शुगर अनियंत्रित होने की वजह से अंधेपन की शिकायत बढ़ जाती है। आइए इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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आंखें - फोटो : Amar Ujala
World Sight Day 2025: हर साल अक्तूबर के दूसरे गुरुवार को 'वर्ल्ड साइट डे' मनाया जाता है। इस बार यह खास दिन आज यानी 9 अक्तूबर को है। इसका सीधा मकसद लोगों को उनकी आंखों के स्वास्थ्य और दृष्टि की देखभाल के लिए जागरूक करना है। यह दिन मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनियंत्रित ब्लड शुगर आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अंधापन तक हो सकता है।

इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी के रूप में जाना जाता है। एक अनुमान के अनुसार दुनियाभर में लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं और उनमें से कई को इसका पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें आंखों के पीछे स्थित लाइट सेंसिटिव टिश्यू यानी रेटिना को नुकसान पहुंचता है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं, उनमें सूजन आ जाती है, और वे लीक होने लगती हैं।

अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो नई कमजोर रक्त वाहिकाएं विकसित हो सकती हैं, जो रेटिना में खून और तरल पदार्थ को लीक कर सकती हैं, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस रोग के शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाता, यही कारण है कि मधुमेह के मरीजों के लिए नियमित आंखों की जांच कराना बेहद आवश्यक है।
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आंखें - फोटो : Adobe Stock
डायबिटिक रेटिनोपैथी कैसे होती है?
डायबिटिक रेटिनोपैथी तब होती है जब लंबे समय तक खून में शुगर का लेवल अनियंत्रित रहता है। इससे रेटिना को पोषण देने वाली रक्त वाहिकाएं प्रभावित होती हैं। शुरुआती चरणों में ये वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं और उनमें से तरल पदार्थ और रक्त रिसने लगता है, जिससे रेटिना में सूजन आ जाती है।

यदि इसे नजरअंदाज किया जाए, तो रेटिना की इन रक्त वाहिकाओं के बंद हो जाने पर नई, असामान्य और नाजुक वाहिकाएं बनने लगती हैं। ये नई वाहिकाएं आसानी से फट जाती हैं और आंखों में खून भर जाता है, जिससे दृष्टि में अचानक कमी आ सकती है।

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डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण - फोटो : Freepik.com
शुरुआती लक्षणों को पहचानें
डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, यही कारण है कि इसे एक 'साइलेंट बीमारी' भी कहा जाता है। हालांकि जैसे-जैसे यह बढ़ती है, कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इनमें धुंधली दृष्टि, आंखों के सामने अचानक काले धब्बे या तैरती हुई आकृतियां (फ्लोटर्स) दिखना, और रात में देखने में कठिनाई होना शामिल है। कुछ लोगों को रंगों को पहचानने में भी परेशानी हो सकती है। अगर आपको मधुमेह है और इनमें से कोई भी लक्षण महसूस होता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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आंखें - फोटो : Adobe Stock
बचाव और नियंत्रण के उपाय
इस गंभीर स्थिति से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लें, संतुलित आहार खाएं, नियमित व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रित रखें। इसके अलावा, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रण में रखना जरूरी है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मधुमेह का पता लगने के तुरंत बाद और उसके बाद हर साल आंखों की पूरी जांच जरूर कराएं। यह जांच शुरुआती संकेतों को पकड़ने में मदद कर सकती है, जिससे आपके इलाज में आसानी हो सकत है।
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आंखें - फोटो : Adobe Stock
जागरूकता ही बचाव है
डायबिटिक रेटिनोपैथी एक गंभीर स्थिति है, लेकिन इसे रोका जा सकता है और इसका इलाज भी संभव है। मधुमेह के मरीजों को यह समझना चाहिए कि आंखों की नियमित जांच सिर्फ चश्मे के नंबर के लिए नहीं, बल्कि आंखों के अंदरूनी स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। 'वर्ल्ड साइट डे' हमें यह याद दिलाता है कि आंखों की देखभाल को प्राथमिकता देना कितना महत्वपूर्ण है। अपनी आंखों को सुरक्षित रखें और एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।

स्रोत और संदर्भ
Diabetic retinopathy

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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