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World Schizophrenia Day: बना रहता है भ्रम और सुनाई देती हैं डरावनी आवाजें, जानिए कितना खतरनाक है सिजोफ्रेनिया

Sat, 24 May 2025 09:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में लगभग 24 मिलियन (2.4 करोड़) लोग या 300 में से 1 व्यक्ति को सिजोफ्रेनिया की दिक्कत हो सकती हैं। सिजोफ्रेनिया एक दीर्घकालिक और गंभीर मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति को भ्रम बना रहता है। ये बीमारी आपके मस्तिष्क के काम करने के तरीके को प्रभावित कर देती है।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं- सिजोफ्रेनिया - फोटो : Freepik.com
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं दुनियाभर में गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। हम सभी अपने शारीरिक स्वास्थ्य पर तो ध्यान देते रहते हैं पर मेंटल हेल्थ को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधित कई समस्याएं काफी गंभीर हो सकती हैं?

सिजोफ्रेनिया ऐसी ही एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य की समस्या है, जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में लगभग 24 मिलियन (2.4 करोड़) लोग या 300 में से 1 व्यक्ति को सिजोफ्रेनिया की दिक्कत हो सकती है। सिजोफ्रेनिया एक दीर्घकालिक और गंभीर मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति को वास्तविकता की धारणा में भ्रम होता है। ये व्यक्ति के व्यवहार, मानसिक स्थिति, सोचने-समझने की क्षमती सभी को प्रभावित कर सकती है।

विश्व सिजोफ्रेनिया दिवस हर साल 24 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य इस गंभीर मानसिक रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने और रोगियों की सहायता में सुधार करने पर ध्यान देना होता है।
 
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सिजोफ्रेनिया क्या है? - फोटो : Freepik.com
सिजोफ्रेनिया और इसका खतरा

कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं जहां हर आवाज पर शक होता हो, हर चेहरा अजनबी लगता हो और खुद की सोच भी परायी लगने लगती हो। सिजोफ्रेनिया वास्तव में यही है। सिजोफ्रेनिया का आपके शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये बीमारी आपके मस्तिष्क के काम करने के तरीके को प्रभावित कर देती है परिणामस्वरूप रोगियों के लिए दैनिक जीवन के कार्य भी काफी कठिन हो जाते हैं। 
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सिजोफ्रेनिया के कारण और समस्याएं - फोटो : Freepik.com
सिजोफ्रेनिया होने के कारण क्या हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिजोफ्रेनिया बीमारी किसी एक कारण से नहीं होती, बल्कि इसके लिए कई जैविक, आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। अगर परिवार में किसी को सिजोफ्रेनिया की दिक्कत रही है, तो इससे अन्य लोगों में भी होने की आशंका बढ़ जाती है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि डोपामिन और ग्लूटामेट जैसे न्यूरोट्रांसमीटर का असंतुलन मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बिगाड़ सकता है, इसके कारण भी सिजोफ्रेनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था या प्रसव के दौरान संक्रमण, ऑक्सीजन की कमी, या पोषण की कमी से दिमागी विकास पर असर पड़ सकता है।
  • बचपन में भावनात्मक आघात, अकेलापन, गरीबी या सामाजिक अलगाव भी सिजोफ्रेनिया को ट्रिगर कर सकती है।

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सिजोफ्रेनिया के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
सिजोफ्रेनिया में क्या दिक्कतें होती हैं?

सिजोफ्रेनिया आपके जीवन को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है। मतिभ्रम होना सिजोफ्रेनिया का सबसे आम लक्षण है। इससे प्रभावित लोगों को भ्रम और डर बना रह सकता है, रोगी उन चीजों को भी वास्तविक मानने लग जाते हैं जो असल में होती ही नहीं हैं। 
  • रोगी को ऐसा लग सकता है जैसै कोई मेरा पीछा कर रहा है, मुझे मारने का प्रयास किया जा रहा है आदि।
  • आपको लग सकता है कि कोई आपके सोचने, बोलने या कार्य करने को नियंत्रित कर रहा है।
  • बोलते समय आपको अपने विचारों को व्यवस्थित करने में परेशानी हो सकती है। 
  • अक्सर नकारात्मक विचार मन को परेशान करते रह सकते हैं, जिससे जीवन काफी कठिन हो जाता है।
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दवाइयों-थेरेपी से होता है इलाज - फोटो : Adobe stock
सिजोफ्रेनिया हो जाए तो क्या करें?

सिजोफ्रेनिया मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति है जिसका समय पर इलाज कराना जरूरी है। अगर आपको घर में किसी व्यक्ति में  सिजोफ्रेनिया जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो जल्द से जल्द मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास ले जाएं।
  • दवाइयां, थेरेपी और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट की मदद से सिजोफ्रेनिया की जटिलताओं को कम किया जा सकता है। 
  • दवाएं दिमाग में डोपामिन जैसे रसायनों का संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
  • साइकोथेरेपी और काउंसलिंग की मदद से जीवन के कार्यों को आसान बनाया जा सकता है।
  • लाइफस्टाइल मैनेजमेंट जैसे नशे से दूर रहना, योग और ध्यान का अभ्यास लक्षणों को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद करती हैं।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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