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World Mental Health Day: 28 करोड़ से ज्यादा लोगों को डिप्रेशन, एक तिहाई लोगों में ये है रोग की मुख्य वजह

Mon, 02 Oct 2023 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंभीर डिप्रेशन और इसके जोखिम कारक - फोटो : istock
मानसिक विकार, वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसपर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो संपूर्ण स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है। स्ट्रेस-एंग्जाइटी के साथ शुरू होने वाली यह दिक्कत डिप्रेशन या अवसाद का रूप ले सकती है। युवाओं में अवसाद की बढ़ती समस्या एक बड़ा स्वास्थ्य जोखिम है जिसको लेकर विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 280 मिलियन (28 करोड़) से अधिक लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर सामाजिक टैबू के चलते इनमें से ज्यादातर लोगों का समय पर इलाज नहीं हो पाता है।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सामाजिक कलंक की भावना को दूर करने और बीमारियों के बारे में शिक्षा-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिप्रेशन के वैसे तो कई कारण हो सकते हैं, पर करीब एक तिहाई रोगियों में एक समस्या बड़ी कॉमन पाई गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया गंभीर अवसाद से पीड़ित लगभग एक-तिहाई लोगों में शराब पीने की लत के बारे में पता चला है।
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शराब पीने से मानसिक स्वास्थ्य के जोखिम - फोटो : Pixabay
शराब और इसके दीर्घकालिक जोखिम

अवसाद के शिकार लोगों पर किए गए अध्ययन में पता चला कि कुछ लोग कहते हैं, ब्रेकअप, नौकरी छूटने या जीवन के तनाव के बाद अपने दुखों को दूर करने के लिए उन्होंने शराब पीना शुरू किया। पर शोधकर्ताओं की टीम ने पाया कि शराब असल में इन समस्याओं को दूर नहीं करती है बल्कि इन्हें दीर्घकालिक रूप से और बढ़ा देती है। शोध में शराब के सेवन और अवसाद के बीच भी एक मजबूत संबंध के बारे में पता चलता है। 
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मानसिक स्वास्थ्य विकार - फोटो : istock
अवसादग्रस्त लोगों में शराब की आदत

सवाल यह है कि क्या नियमित शराब पीने से अवसाद होता है, या अवसादग्रस्त लोगों के शराब पीने की आशंका अधिक होती है? जबाव है ये दोनों ही संभव हैं।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि अवसादग्रस्त लोगों में अगले कुछ वर्षों में शराब पीने की आदत विकसित होने की अधिक आशंका देखी गई है। अमर उजाला से बातचीत में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, अपवाद ये है कि शराब असल में अवसाद की जटिलताओं को और अधिक बढ़ाने वाली हो सकती है। डिप्रेशन या तनाव से राहत पाने के लिए अगर आप शराब का सहारा लेते है तो इससे आपको कुछ समय तो आराम महसूस हो सकता है पर दीर्घकालिक तौर पर ये रोग के निदान में देरी का कारण बन सकती है।

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शराब औऱ इसके दुष्प्रभाव - फोटो : istock
महिलाओं के शराब पीने की आशंका

अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया, जिन महिलाओं में अवसाद का इतिहास रहा है, उनमें शराब पीने की आशंका दोगुनी से भी अधिक हो सकती है। शराब पीने से अवसाद के लक्षण और बदतर हो सकते हैं। इसके कारण कई लोगों में आत्महत्या के विचार आने की आशंका भी बढ़ जाती है। इतना ही नहीं यदि आपको भारी मात्रा में शराब पीने की आदत रही है तो ये एंटीडिप्रेशन की दवाओं के प्रभाव को भी कम कर देती है। 
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शराब सेहत के लिए हानिकारक - फोटो : PTI
शराब की थोड़ी भी मात्रा नुकसानदायक

डॉ सत्यकांत बताते हैं, शराब को अवसाद के जोखिमों को बढ़ाने वाला कारक कहा जा सकता है। जो लोग शराब पीते हैं उनमें ब्लूज़ होने की अधिक आशंका हो सकती है। बहुत अधिक शराब पीने से आपके मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचता है और इसके कारण भी अवसाद हो सकता है। अल्कोहल के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकती है, इसके कारण भी न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। भले ही आप कम मात्रा में शराब पीते हैं फिर से ये शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है, इससे पूरी तरह से दूरी बनाना जरूरी है।




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स्रोत और संदर्भ
Alcohol, Anxiety, and Depressive Disorders

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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