कुष्ठ रोग, उन बीमारियों में से एक है, जिसमें रोगी को सिर्फ रोग से नहीं इसके कारण समाज में फैले स्टिग्मा से भी मुकाबला करना होता है। हर साल, जनवरी के आखिरी रविवार को कुष्ठ रोग के शिकार लोगों का हौंसला और बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने, कुष्ठ से संबंधित कलंक और भेदभाव को समाप्त करने हेतु लोगों को जागरूक के लिए 'विश्व कुष्ठ रोग' दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार इस साल "यूनाइटेड फॉर डिग्निटी" थीम के साथ कुष्ठ रोग दिवस मनाया जा रहा है, जिसके माध्यम से कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों की गरिमा का सम्मान किया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुष्ठ रोग या हेन्सन रोग एक संक्रामक स्थिति है, जिसके कारण त्वचा, नसें और आंख-नाक की परत प्रभावित हो सकती है। कुष्ठ रोग एक धीरे-धीरे बढ़ने वाले जीवाणु के कारण होता है जिसे माइकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है। इस संक्रमण के शिकार लोगों को हाथों और पैरों में सुन्नता और कमजोरी, संवेदना की कमी और त्वचा के हल्के रंग या लाल रंग के पैच दिखने की समस्या हो सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।