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World Hypertension Day 2023: इन विटामिन्स की कमी के कारण भी हो सकती है हाई ब्लड प्रेशर की समस्या,बरतें सावधानी

Wed, 17 May 2023 10:14 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली
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ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
ब्लड प्रेशर बढ़ना हमारे शरीर के लिए कई प्रकार की दिक्कतों को बढ़ाने का कारण माना जाता है, इससे सबसे ज्यादा खतरा हृदय रोगों को हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट अटैक से लेकर स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। 

उच्च रक्तचाप एक क्रोनिक स्थिति है जो न केवल आपके हृदय पर तनाव बढ़ाती है, साथ ही इससे ब्रेन स्ट्रोक जैसी समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती हृदय रोगों की समस्या के बारे में लोगों को जागरूक करने और बचाव के तरीकों के बारे में शिक्षित करने के लिए हर साल 17 मई को वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे मनाया जाता है।

120/80 मिमी एचजी या उससे कम की ब्लड प्रेशर रीडिंग को सामान्य माना जाता है, पर इसका लगातार बढ़े रहना कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। अधिक वजन, नमक का अधिक सेवन, व्यायाम की कमी, बहुत अधिक शराब या कॉफी का सेवन रक्तचाप को बढ़ाने वाला माना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि यदि आपमें कुछ विटामिन्स और मिनरल्स की कमी है तो इसके कारण भी ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो सकती है?
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पोटैशियम वाली चीजों का करें सेवन - फोटो : istock
पोटेशियम बहुत आवश्यक

पोटेशियम एक आवश्यक खनिज है जो हमारी कोशिकाओं के अंदर द्रव के सामान्य स्तर को बनाए रखने में मदद करता है। हेल्थ हार्वर्ड के अनुसार, यह दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है, मांसपेशियों और तंत्रिकाओं के उचित कार्य को सुनिश्चित करने के साथ शरीर से अतिरिक्त सोडियम को शरीर से निकालने में मदद करता है, जिसका बढ़ना उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारणों में से एक है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि पोटेशियम रक्त वाहिकाओं की दीवारों को आराम देता है, जिससे रक्तचाप को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। कई अध्ययनों में पोटेशियम की कमी को बढ़े हुए रक्तचाप का प्रमुख कारण पाया गया है।
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आहार में शामिल करें विटामिन डी वाली चीजें - फोटो : Pixabay
विटामिन-डी की कमी से भी हो सकता है जोखिम

विटामिन-डी को हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि जिन लोगों में इसकी कमी होती है उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का जोखिम काफी बढ़ जाता है। साओल हार्ट इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों के मुताबिक विटामिन-डी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सीधे रक्तचाप को नियंत्रित बनाए रखने में मदद करते हैं।

शरीर में इसकी कमी होने के कारण हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है, आहार में इसकी मात्रा जरूर सुनिश्चित करें।

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शरीर के लिए आवश्यक है विटामिन-के - फोटो : iStock
विटामिन-के की कमी भी नुकसानदायक

विटामिन-डी की ही तरह विटामिन-के का भी शरीर में कम स्तर हाई ब्लड प्रेशर के जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि विटामिन-के धमनियों में खनिजों के निर्माण को रोककर रक्तचाप को कम रखने में मदद करता है । यह हृदय को बेहतर तरीके  से रक्त पंप करने में मदद करता है। जिन लोगों में इस विटामिन की कमी होती है उनमें रक्तचाप बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है।
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ब्लड प्रेशर में क्या खाना चाहिए? - फोटो : istock
स्वस्थ आहार का सेवन करके रखें ब्लड प्रेशर कंट्रोल

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं यदि हम सभी आहार को ठीक रखने पर ध्यान दे लें तो ब्लड प्रेशर की समस्याओं को कम किया जा सकता है। एक दिन में 1500 मिलीग्राम से कम की मात्रा में नमक ही का सेवन करें। लो फैट और ढेर सारे फाइबर वाली चीजों को आहार में शामिल करने से भी इस समस्या को कम किया जा सकता है।

आहार में साबुत अनाज, बहुत सारे फल और सब्जियां, डेयरी उत्पाद को शामिल करके रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती हैं। हर दिन भोजन के एक चौथाई हिस्से में फल और सब्जिया खाने का लक्ष्य रखें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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