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World Homeopathy Day: शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता मजबूत करती है होम्योपैथी, कई रोगों का हो सकता है उपचार

Fri, 29 Mar 2024 02:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वर्ल्ड होम्योपैथी डे 2024 - फोटो : istock
होम्योपैथी, वर्षों से प्रयोग में लाई जा रही प्रभावी चिकित्सा पद्धति है, इसका 200 साल पुराना इतिहास रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपचार प्रतिक्रिया को उत्तेजित करने और शरीर की खुद को ठीक करने की क्षमता को मजबूत करने वाली पद्धति है। कई प्रकार की बीमारियों के उपचार में होम्योपैथी  को प्रयोग में लाकर लाभ प्राप्त किया जाता रहा है। 1700 के अंत में जर्मनी में इस चिकित्सा को विकसित किया गया था। यह कई यूरोपीय देशों में आम है, भारत में भी होम्योपैथी को प्रयोग में लाकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जाता रहा है। 

होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के उपलक्ष्य में हर साल 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य  होम्योपैथी चिकित्सा के बारे में लोगों को जागरूक करना और इस वैकल्पिक प्रणाली के उपयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाना है।
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होम्योपैथी इलाज - फोटो : iStock
विश्व होम्योपैथी दिवस 2024  की थीम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, होम्योपैथी ऐसी चिकित्सा प्रणाली है जो इस विश्वास पर आधारित है कि शरीर स्वयं को ठीक कर सकती है। उपचार प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए रोग के आधार पर दवाएं दी जाती हैं, जिससे शरीर उस दोष का स्वयं से उपचार कर सके।

विश्व होम्योपैथी दिवस 2024 के लिए थीम है- "होम्योपरिवार: एक स्वास्थ्य, एक परिवार"। विशेषज्ञों का कहना है कि होम्योपैथिक दवाओं के बारे में जागरूकता और इसकी सफलता की दर को बढ़ाने से कई प्रकार की समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।
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शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली - फोटो : Pixabay
शरीर की सुरक्षा प्रणाली को ट्रिगर करती है ये चिकित्सा

विशेषज्ञ कहते हैं, होम्योपैथी के पीछे एक बुनियादी धारणा है शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली को ट्रिगर करके बीमारियों का उपचार करना। उदाहरण के लिए प्याज के कारण आपकी आंखों में पानी आ जाता है, इसीलिए इसका उपयोग आंखों की एलर्जी के उपचार में किया जा सकता है। होम्योपैथी यह भी मानती है कि खुराक जितनी कम होगी, दवा उतनी ही अधिक शक्तिशाली होगी। 

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एलर्जी की समस्या - फोटो : iStock
कई प्रकार की समस्याओं में होता रहा है उपयोग

कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज वर्षों से इस वैकल्पिक चिकित्सा के माध्यम से करके लाभ प्राप्त किया जाता रहा है। एलर्जी, माइग्रेन, अवसाद ,क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम, रूमेटाइड आर्थराइटिस, आंत की बीमारी और प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम जैसी समस्याओं में होम्योपैथी के उपयोग को फायदेमंद माना जाता है।
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होम्योपैथिक चिकित्सा - फोटो : iStock
गंभीर स्थितियों में भी लाभप्रद है होम्योपैथी?

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्थमा, कैंसर और हृदय रोग जैसी जानलेवा बीमारियों या आपातस्थिति में होम्योपैथिक दवा के लाभ नहीं हैं। कुछ होम्योपैथिक उत्पादों जिन्हें "नोसोड्स" कहा जाता है इसको कई देशों में वैक्सीन के विकल्प के तौर पर भी प्रयोग में लाया जाता रहा है, लेकिन इसकी प्रभाविकता साबित करने के लिए पर्याप्त शोध नहीं है।

इसके अलावा होम्योपैथी चिकित्सा कितनी प्रभावी हो सकती है, इसको लेकर भी वैज्ञानिकों का मिला-जुला मत देखा जाता रहा है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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