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World Hepatitis Day 2024: हेपेटाइटिस से हो सकता है लिवर फेलियर, जानिए संक्रमण के लक्षण और बचाव के तरीके

Sun, 28 Jul 2024 11:20 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हेपेटाइटिस का संक्रमण - फोटो : istock
लिवर से संबंधित बीमारियों का खतरा कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है। हेपेटाइटिस ऐसी ही लिवर की एक संक्रामक बीमारी है। आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होने वाली हेपेटाइटिस की समस्या लिवर में सूजन का कारण बनती है। ये कई अन्य कारणों जैसे ऑटोइम्यून रोगों की वजह से भी हो सकती है, इस स्थिति में आपका शरीर लिवर के स्वस्थ ऊतकों को क्षति पहुंचाने लगता है। 

हेपेटाइटिस मुख्यरूप से पांच प्रकार- हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई का होता है। प्रत्येक प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के लिए एक अलग वायरस जिम्मेदार होता है। कुछ मामलों में, हेपेटाइटिस से लिवर डेमैज, लिवर फेलियर, सिरोसिस, लिवर कैंसर या मृत्यु का भी खतरा हो सकता है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि वर्तमान में दुनियाभर में 354 मिलियन (35.4 करोड़) से अधिक लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित हो सकते हैं। 

हेपेटाइटिस के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और इस रोग से बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। आइए इस रोग के बारे में जानते हैं।
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hepatitis b, hepatitis c - फोटो : istock
हेपेटाइटिस की समस्या

हेपेटाइटिस ए, बी और सी के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। 
  • हेपेटाइटिस ए- हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) के संक्रमण के कारण होती है। दूषित भोजन या पानी के कारण ये संक्रमण होता है। 
  • हेपेटाइटिस बी की समस्या के लिए हेपेटाइटिस बी वायरस (HBV) को जिम्मेदार माना जाता है। हेपेटाइटिस बी का संक्रमण आमतौर पर अल्पकालिक होता है।
  • इसी तरह से हेपेटाइटिस सी वायरस (HCV) के कारण हेपेटाइटिस सी संक्रमण होता है। शरीर के तरल पदार्थों जैसे रक्त या वीर्य के संपर्क में आने से ये हो सकता है।
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पीलिया की समस्या - फोटो : istock
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हैं संक्रमित

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, क्रोनिक हेपेटाइटिस जैसे हेपेटाइटिस बी और सी के संक्रमण में आपमें तब तक लक्षण नहीं दिखते हैं जब तक कि ये लिवर को गंभीर रूप से न प्रभावित कर दे। वहीं एक्यूट हेपेटाइटिस की स्थिति में संक्रमण के तुरंत बाद लक्षण दिख सकते हैं।

आमतौर पर हेपेटाइटिस की स्थिति में थकान, फ्लू जैसे लक्षण, पेशाब का रंग गहरा होने, पीला मल होने, पेट में दर्द,  भूख न लगने और अकारण वजन कम होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। लिवर की समस्याओं के कारण अक्सर त्वचा और आंखों का पीला पड़ने (पीलिया) का खतरा बना रहता है।

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हेपेटाइटिस का इलाज क्या है - फोटो : istock
हेपेटाइटिस का क्या इलाज है?

हेपेटाइटिस के प्रकार और संक्रमण की स्थिति के आधार पर उपचार के विकल्प अलग-अलग हो सकते हैं। हेपेटाइटिस ए के लिए आमतौर पर उपचार की आवश्यकता नहीं हो सकती है। अगर आपको उल्टी या दस्त का अनुभव होता है, तो आपका डॉक्टर हाइड्रेशन और पोषण को बनाए रखने की सलाह देते हैं।

एक्यूट हेपेटाइटिस बी के लिए भी कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। कुछ लोगों को एंटीवायरल उपचार की आवश्यकता हो सकती है। इसी तरह से हेपेटाइटिस सी में भी  एंटीवायरल दवाओं को प्रयोग में लाया जाता है।
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हेपेटाइटिस से कैसे बचें? - फोटो : istock
हेपेटाइटिस के संक्रमण से कैसे बचें?

ऐसे टीके उपलब्ध हैं जो हेपेटाइटिस वायरस से बचाव में मदद कर सकते हैं। हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी के टीके लगाने की सलाह देते हैं। आमतौर पर बचपन के पहले 6 महीनों में तीन टीके लगाए जाते हैं। हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीकाकरण हेपेटाइटिस डी को भी रोक सकता है।

हेपेटाइटिस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका स्वच्छता का अभ्यास करना है। साफ पानी और साफ भोजन का ही सेवन किया जाना चाहिए। हेपेटाइटिस बी, सी और डी वायरस संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के कारण भी फैलते हैं, इनसे भी बचाव किया जाना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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