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Cancer: भारतीय युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं इन दो कैंसर के मामले, डॉक्टर से जानिए क्या है इसकी मुख्य वजह

Sat, 27 Jul 2024 06:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कैंसर का खतरा (सांकेतिक) - फोटो : istock
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती बीमारी है, हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। पुरुषों में फेफड़े- मुंह और प्रोस्टेट कैंसर जबकि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। कैंसर को लेकर सामने आई हालिया जानकारी और भी चिंता बढ़ाने वाली है। एक अध्ययन में पाया गया है कि भारत में सिर और गर्दन में कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। कैंसर के कुल रोगियों में से 26 फीसदी में ये समस्या है। 

हर साल 27 जुलाई को वर्ल्ड हेड एंड नेक कैंसर डे मनाया जाता है। इस अवसर पर जारी किए गए अध्ययन के निष्कर्ष में बताया गया है कि देश में इन दो अंगों में कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ रही है।

दिल्ली स्थित एक नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन ने एक मार्च से 30 जून तक अपने हेल्पलाइन नंबर पर प्राप्त कॉल से डेटा एकत्र करके यह अध्ययन किया। इसमें देशभर में 1,869 कैंसर रोगियों का डेटा शामिल है। शोधकर्ताओं ने पाया कि युवा आबादी, विशेषकर पुरुषों में इन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, जोकि काफी चिंताजनक हैं।
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गर्दन में कैंसर के मामले - फोटो : istock
क्या है बढ़ते कैंसर की मुख्य वजह?

भारत में 'कैंसर मुक्त भारत अभियान' का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. आशीष गुप्ता ने रिपोर्ट में कहा कि सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, विशेष रूप से युवा पुरुषों में इसका खतरा अधिक है। इनके लिए तंबाकू के सेवन या फिर ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) संक्रमण को कारण माना जा सकता है। डॉ. आशीष ने बताया लगभग 80-90 प्रतिशत मुंह के कैंसर के मरीजों में तम्बाकू के सेवन की आदत देखी गई है, चाहे वह धूम्रपान हो या तंबाकू चबाने की आदत। 

जीवनशैली में बदलाव करके सिर और गर्दन के कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
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सिर और गर्दन के कैंसर - फोटो : istock
कैंसर का समय पर निदान न हो पाना चिंताजनक

चिंताजनक बात ये है कि भारत में कैंसर के लगभग दो तिहाई मामलों का पता तब चल पाता है जब ये आखिरी के चरणों में पहुंच जाता है। यहां से इलाज और रोगी की जान बचा पाना दोनों कठिन हो जाता है। डॉ  गुप्ता ने कहा तम्बाकू छोड़ने के लिए जागरूकता बढ़ाने और बीमारी का जल्द पता लगाने के लिए समय पर जांच करवाने पर जोर देकर इस बढ़ते खतरे को कम किया जा सकता है। 

सिर और गर्दन के कैंसर के बाद गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर का स्थान आता है, जिसके करीब 16 प्रतिशत मरीज हैं। भारत में पंद्रह प्रतिशत मामले स्तन कैंसर और करीब 9 प्रतिशत रक्त कैंसर के हैं। ग्लोबोकैन डेटा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने देश में कैंसर के खतरे को लेकर सावधान किया है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2040 तक 2.1 मिलियन (21 लाख) कैंसर के नए मामले सामने आ सकते हैं। 

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कैंसर का खतरा - फोटो : istock
80% से ज्यादा रोगियों का इलाज संभव

डॉ गुप्ता बताते हैं, सिर और गर्दन के कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। नवीनतम कैंसर उपचार न केवल बीमारी को ठीक करने को प्राथमिकता देता है, बल्कि जीवित लोगों के जीवन की अच्छी गुणवत्ता भी सुनिश्चित करता है।

अगर पहले या दूसरे चरण में भी कैंसर का पता चल जाए तो 80% से ज्यादा रोगियों में सिर और गर्दन के कैंसर का इलाज संभव है। कैंसर के इलाज के क्षेत्र में, हमारे पास आधुनिक शोध आधारित दवाएं और उपचार के तरीके हैं जिससे बेहतर नतीजे और बेहतर जीवन की गुणवत्ता मिल सकती है।
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कैंसर को लेकर जागरूकता जरूरी - फोटो : istock
कैंसर रोगी ले सकते हैं मदद

देश में कैंसर के खिलाफ जंग को मजबूत करने के उद्देश्य से कैंसर मुक्त भारत अभियान के तहत, हाल ही में एक निःशुल्क राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर (93-555-20202) शुरू किया गया, जो सोमवार से शनिवार तक सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चालू रहता है। कैंसर रोगी इस नंबर पर कॉल करके कैंसर विशेषज्ञों (ऑन्कोलॉजिस्ट) से सीधे बात कर सकते हैं या बिना किसी शुल्क के वीडियो कॉल के माध्यम से अपने उपचार के बारे में चर्चा कर सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखकर कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है। इसके अलावा समय पर लक्षणों पर ध्यान देना कैंसर के इलाज और जान बचाने की संभावना को बढ़ाने में मददगार हो सकता है।  



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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