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World Heart Day 2025: क्या है 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम', आखिर ब्रेकअप के बाद अचानक सीने में दर्द क्यों होता है?

Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अक्सर ऐसा होता है कि जब लोगों को कोई बड़ा नुकसान होता है या कोई सदमा लगता है तो उनके सीने में दर्द होने लगता है हार्ट अटैक जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
  • इसका सबसे अच्छा उदाहरण है रिलेशनशिप में लोगों का ब्रेकअप होना। ऐसी स्थिति को ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कहते हैं, जिसके बारे में आपको जानना चाहिए।
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ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम - फोटो : Freepik.com
What is Broken Heart Syndrome: हमारी फिल्मों और साहित्य में अक्सर दिल को हमारी हर भावना का केंद्र माना जाता है। खुशी में 'दिल बाग-बाग हो जाता है' और किसी गहरे दुख में 'दिल टूट जाता है'। आमतौर पर हम इसे केवल एक मुहावरा मानते हैं, लेकिन ये सिर्फ मुहावरे तक सीमित नहीं है। आपने देखा होगा जब भी किसी को बड़ा सदमा लगता है, जैसे किसी प्रियजन की मृत्यु, ब्रेकअप या बड़े वित्तीय घाटे के बाद सीने अचानक दर्द होने लगता है। ऐसी स्थिति को 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' कहते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है। इसी अवसर पर आइए हार्ट से जुड़ी समस्या 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' के बारे में जानते हैं। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें इंसान किसी बडे़ सदमें के बाद अपने दिल में अचानक दर्द और हल्का ठंडा महसूस करता है। ऐसे भावनात्मक तनाव जैसी स्थिति में व्यक्ति को हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस होते हैं। यह स्थिति हमें सिखाती है कि हमारे मन का स्वास्थ्य हमारे दिल के स्वास्थ्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
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World Heart Day 2025 - फोटो : adobe stock photos
क्या होता है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में?
जब कोई व्यक्ति अत्यधिक भावनात्मक या शारीरिक तनाव से गुजरता है, तो शरीर में अचानक स्ट्रेस हॉर्मोन (जैसे एड्रेनालाईन) का स्तर बहुत बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन दिल की मांसपेशियों, विशेष रूप से दिल के मुख्य पंपिंग चैंबर को अस्थायी रूप से 'स्तब्ध' या कमजोर कर देते हैं। इससे दिल का आकार गुब्बारे की तरह फूल जाता है और उसकी खून पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती है।

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वर्ल्ड हार्ट डे 2025 - फोटो : Freepik.com
हार्ट अटैक जैसे होते हैं लक्षण
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि इसके लक्षण एक वास्तविक हार्ट अटैक से लगभग मिलते-जुलते हैं। मरीज को सीने में अचानक तेज दर्द (एनजाइना), सांस लेने में गंभीर तकलीफ और कभी-कभी जबड़े या बांह तक फैलने वाले दर्द का अनुभव हो सकता है।

यह समानता इतनी अधिक होती है कि व्यक्ति के लिए यह समझना असंभव हो जाता है कि उसे हार्ट अटैक आया है या यह सिंड्रोम है। इसीलिए, ऐसे किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और बिना कोई जोखिम लिए तत्काल मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
 
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वर्ल्ड हार्ट डे 2025 - फोटो : adobe stock
हार्ट अटैक और इसमें क्या है मुख्य अंतर?
एक क्लासिक हार्ट अटैक का मुख्य कारण धमनियों में ब्लॉकेज होता है, जिससे दिल के हिस्से में खून की सप्लाई रुक जाती है। वहीं ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में मरीज की धमनियां ब्लॉक नहीं होती हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर एंजियोग्राम जैसी जांच से यह पता लगाते हैं कि धमनियों में कोई रुकावट नहीं है या दिल का एक हिस्सा अस्थायी रूप से कमजोर हो गया है।
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वर्ल्ड हार्ट डे 2025 - फोटो : Freepik.com
कौन हैं ज्यादा खतरे में और क्या है इलाज?
यह सिंड्रोम पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम है। अच्छी बात यह है कि यह आमतौर पर एक अस्थायी स्थिति है और ज्यादातर मरीज कुछ दिन या हफ्तों में पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। डॉक्टर दिल पर तनाव कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाएं देते हैं। यह स्थिति हमें सिखाती है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी हमारे दिल के लिए उतना ही जरूरी है।

स्रोत और संदर्भ
Broken heart syndrome




नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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