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Health Alert: मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारियों पर ब्रेक लगाने का प्लान, डब्ल्यूएचओ ने दिया समाधान

Fri, 16 Jan 2026 08:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, शुगर वाले ड्रिंक्स और अल्कोहल पर ज्यादा टैक्स लगाने से नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज जैसे डायबिटीज, हृदय रोग, मोटापा और लिवर से जुड़ी बीमारियों का बोझ कम किया जा सकता है।
  • डब्ल्यूएचओ सलाह देता है कि अगर लोग अपनी जीवनशैली में छोटे लेकिन स्थायी बदलाव करें, तो डायबिटीज और हृदय रोगों जैसी जानलेवा बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
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नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
भारत सहित दुनिया के कई देशों में लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में नॉन कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते मामले गंभीर चिंता का कारण हैं। नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज वे बीमारियां हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलतीं, बल्कि क्रॉनिक रूप से सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाती जाती हैं। आहार-दिनचर्या में गड़बड़ी, धूम्रपान, शराब और शारीरिक निष्क्रियता आदि को इस तरह की बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है।

हृदय रोग, डायबिटीज, कैंसर और क्रॉनिक श्वसन रोग आदि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज का उदाहरण हैं। भारत की बड़ी आबादी इन रोगों का शिकार है। अब सवाल ये है कि इन बीमारियों के खतरे को कम कैसे किया जाए?

नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कुछ जरूरी सलाह दिए हैं, जिनके बारे में जान लेना आपके लिए बहुत जरूरी है।
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शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की सलाह - फोटो : Freepik.com
नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज की रोकथाम कैसे हो?

डब्ल्यूएचओ ने कहा, नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज को रोकने के लिए मीठे ड्रिंक्स और शराब से लोगों को दूरी बनानी चाहिए। अगर इनपर टैक्स बढ़ा दिया जाए तो बीमारियों की रोकथाम में मदद मिल सकती है। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से अपील की है कि वे इनका इस्तेमाल कम करने पर जोर दें और इन उत्पादों पर टैक्स बढ़ाएं। 
  • डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ज्यादातर देशों में इन उत्पादों पर टैक्स कम है। 
  • टैक्स कम होने से ये उत्पाद सस्ते हैं, जिससे लोगों तक इनकी पहुंच आसान है।
  • इन चीजों के अधिक सेवन के कारण मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। 
  • अगर टैक्स बढ़ा दिया जाए तो इनके दाम बढ़ जाएंगे जिससे लोग इनका सेवन कम करेंगे। इससे बीमारियों की गति को रोका जा सकता है।
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टेड्रोस एडनोम घेबियस - फोटो : ANI
क्या कहते हैं डब्ल्यूएचओ के अधिकारी?

डब्ल्यूएचओ ने कहा, जहां ऐसे ड्रिंक्स से अरबों डॉलर का फायदा होता है, वहीं सरकारें हेल्थ से जुड़े टैक्स के जरिए उसका बहुत छोटा हिस्सा ही हासिल कर पाती हैं, जिससे समाज को लंबे समय तक स्वास्थ्य और आर्थिक लागत उठानी पड़ती है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस एडनोम घेब्रेयसस ने एक बयान में कहा, हेल्थ टैक्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारियों को रोकने के लिए हमारे पास सबसे मजबूत तरीकों में से एक है। तंबाकू, मीठे पेय पदार्थ और शराब आदि पर टैक्स बढ़ाकर, इसके इस्तेमाल को कम किया जा सकता है।

इसके साथ ही इनसे जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए फंड भी जुटाया जा सकता है। गरीब देशों में जहां फंडिंग कम हो रही है, ऐसे टैक्स हेल्थ सिस्टम चलाने में टिकाऊ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद कर सकते हैं।

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नॉन-कम्युनिकेबल रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
तंबाकू-शराब और मीठे पेय पर टैक्स लगाने की सलाह

डब्ल्यूएचओ के एक अधिकारी जनरल जेरेमी फरार कहते हैं, तंबाकू पर टैक्स लगाने से उसका इस्तेमाल कम होता है। मीठे पेय पर भी टैक्स को बढ़ाकर इसकी खपत कम करने में मदद मिल सकती है। इसका सीधा असर डायबिटीज, मोटापा और हृदय की बीमारियों की रोकथाम पर भी देखने को मिल सकता है।
  • जो देश नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों में बढ़ोतरी से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, उनके लिए ये तरीका काफी असरदार हो सकता है। इससे हेल्थकेयर में निवेश की संभावना भी बढ़ती है।
  • फिलीपींस, ब्रिटेन और लिथुआनिया में उठाए गए कदमों का हवाला डब्ल्यूएचओ के निदेशक ने कहा, कई देशों ने दिखाया है कि जब इन्हें सही तरीके से प्रयोग में लाया जाता है तो इसके बेहतर परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं।
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पैक्ड जूस है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
डब्ल्यूएचओ ने शराब और मीठे पेय पदार्थों पर टैक्स के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कम से कम 116 देश सोडा जैसे मीठे पेय पदार्थों पर टैक्स लगाते हैं।
  • कई अन्य देशों में चीनी वाले उत्पाद जैसे पैक्ड फलों के जूस, फ्लेवर मिल्क वाले पेय और कॉफी और चाय पर टैक्स नहीं या फिर बहुत कम है।
  • शराब पर रिपोर्ट में पाया गया कि 2022 से 2024 तक 56 देशों में बीयर ज्यादा सस्ती हो गई।
  • कम से कम 25 देशों में, खासकर यूरोप में, वाइन को एक्साइज टैक्स से छूट दी गई थी।


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स्रोत
Increase taxes on sugary drinks and alcohol to save lives, urges WHO


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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