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Ebola: इबोला वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित, जानिए बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के बारे में जिसने बढ़ा दी है टेंशन

Mon, 18 May 2026 08:41 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। इबोला की शुरुआत सामान्य बुखार जैसी लग सकती है, लेकिन कुछ ही दिनों में यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर देता है।
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इबोला वायरस का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
बीते वर्षों में दुनियाभर में कई तरह की संक्रामक बीमारियों का खतरा देखा गया। साल 2020-23 तक दुनिया ने कोविड-19 महामारी का डर देखा, जिसमें लाखों लोगों की मौत हुई। मई के शुरुआती हफ्ते में क्रूज शिप एमवी होंडियस में फैले हंतावायरस संक्रमण से कई देशों में बढ़ी चिंताओं के बीच विशेषज्ञों की टीम अब इबोला संक्रमण को लेकर अलर्ट कर रही है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला का व्यापक प्रकोप देखा जा रहा है। बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने रविवार 17 मई को इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वायरस का एक नए स्ट्रेन 'बुंडिबुग्यो' की सूचना मिली है, जिसके कारण यह प्रकोप देखा जा रहा है। संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, हालांकि अभी इसे  'महामारी आपातकाल' नहीं घोषित किया जा सकता है।

कांगो और युगांडा के आसपास के देशों में इसके और फैलने का खतरा बहुत ज्यादा है, इसलिए वहां की सरकारों को अलर्ट किया गया है।
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कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
इबोला के नए स्ट्रेन को लेकर अलर्ट

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह वायरस संक्रमित लोगों में से लगभग एक-तिहाई लोगों की जान ले लेता है। इसलिए इसके खतरे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
 
  • वैसे को इबोला के ज्यादातर आउटब्रेक छोटे ही होते हैं, लेकिन विशेषज्ञ 2014-16 के आउटब्रेक को लेकर अब भी चिंतित हैं।
  • उस समय, पश्चिम अफ्रीका में 28,600 लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए थे, जो इस बीमारी का अब तक का सबसे बड़ा आउटब्रेक था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएच) द्वारा इबोला को फिलहाल 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित करने का मतलब यह नहीं है कि हम कोविड जैसी किसी महामारी के शुरुआती दौर में हैं। इबोला से पूरी दुनिया को होने वाला खतरा अब भी बहुत कम है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'पैंडेमिक साइंसेज इंस्टीट्यूट' की डॉ. अमांडा रोजेक कहती हैं, इससे यह जरूर पता चलता है कि हालात इतने पेंचीदा हैं कि उनके लिए अंतरराष्ट्रीय तालमेल की जरूरत है। दक्षिण सूडान और रवांडा जैसे पड़ोसी देशों के लिए अब भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है, जिन्हें व्यापार और यात्रा के गहरे संबंधों की वजह से 'हाई रिस्क' वाला इलाका माना जाता है।
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इबोला वायरस का खतरा - फोटो : Freepik.com
इबोला के खतरे को जानिए

इबोला एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है। इबोला वायरस जानवरों, मुख्य रूप से चमगादड़ों को संक्रमित करता है लेकिन अगर आप इनके सीधे संपर्क में आते हैं, तो इंसानों में भी संक्रमण होने का जोखिम रहता है।
 
  • कांगो और युगांडा में फैली इस बीमारी के प्रकोप के लिए इबोला की 'बुंडिबुग्यो' स्ट्रोन को बड़ा कारण माना जा रहा है।
  • बुंडिबुग्यो के कारण पहले भी साल 2007 और 2012 में बीमारी फैल चुकी है जिसके कारण 30% संक्रमितों की मौत हो गई थी।
  • इबोला वायरस की बुंडिबुग्यो प्रजाति के लिए अब तक कोई टीका या दवा उपलब्ध नहीं है, हालांकि कुछ प्रायोगिक टीकों पर काम चल रहा है।

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इबोला की समस्या और इसका बुखार - फोटो : Adobe Stock
इबोला की क्या पहचान है?

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ट्रूडी लैंग कहती हैं कि इस प्रकोप में बुंडीबुग्यो से निपटना सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। माना जाता है कि किसी व्यक्ति के संक्रमित होने के 2 से 21 दिनों के बीच लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

 
  • शुरुआत में ये लक्षण बिल्कुल फ्लू जैसे होते हैं जिसमें बुखार, सिरदर्द और थकान की समस्या होती है। 
  • जैसे-जैसे इबोला बढ़ता है, इससे उल्टी, दस्त और शरीर के अंगों का काम न करने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
  • कुछ मरीजों में शरीर के अंदर और बाहर से ब्लीडिंग होने की समस्या भी देखी गई है।
  • गंभीर स्थिति में इबोला लीवर और किडनी को भी प्रभावित कर सकता है।
  • डब्ल्यूएचओ का कहना है कि हर मरीज में ब्लीडिंग के लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है, लेकिन गंभीर मामलों में यह जानलेवा स्थिति बन सकती है।
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इबोला से बचाव कैसे करें? - फोटो : Freepik.com
इबोला से बचाव के तरीके क्या हैं?

डॉक्टरों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने प्रभावित क्षेत्र की यात्रा की हो या संक्रमित मरीज के संपर्क में आया हो और उसके बाद तेज बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच करानी चाहिए। शुरुआती पहचान से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
 
  • संक्रमित मरीज के खून, उल्टी, लार, पसीने, वीर्य या अन्य शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से संक्रमण फैल सकता है। 
  • संक्रमित कपड़े, बिस्तर या मेडिकल उपकरण भी वायरस फैला सकते हैं।

इबोला से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति और उसके शरीर के तरल पदार्थों से दूरी बनाए रखना। संक्रमित व्यक्ति को तुरंत आइसोलेट करना बेहद जरूरी माना जाता है। वर्तमान में, इबोला वायरस बीमारी को रोकने के लिए दो टीके उपलब्ध हैं। हालांकि वर्तमान बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा हथियार माना जा रहा है। 



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स्रोत:
Epidemic of Ebola Disease caused by Bundibugyo virus in the Democratic Republic of the Congo and Uganda determined a public health emergency of international concern


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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