कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप
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इबोला के नए स्ट्रेन को लेकर अलर्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह वायरस संक्रमित लोगों में से लगभग एक-तिहाई लोगों की जान ले लेता है। इसलिए इसके खतरे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
- वैसे को इबोला के ज्यादातर आउटब्रेक छोटे ही होते हैं, लेकिन विशेषज्ञ 2014-16 के आउटब्रेक को लेकर अब भी चिंतित हैं।
- उस समय, पश्चिम अफ्रीका में 28,600 लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए थे, जो इस बीमारी का अब तक का सबसे बड़ा आउटब्रेक था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएच) द्वारा इबोला को फिलहाल 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित करने का मतलब यह नहीं है कि हम कोविड जैसी किसी महामारी के शुरुआती दौर में हैं। इबोला से पूरी दुनिया को होने वाला खतरा अब भी बहुत कम है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 'पैंडेमिक साइंसेज इंस्टीट्यूट' की डॉ. अमांडा रोजेक कहती हैं, इससे यह जरूर पता चलता है कि हालात इतने पेंचीदा हैं कि उनके लिए अंतरराष्ट्रीय तालमेल की जरूरत है। दक्षिण सूडान और रवांडा जैसे पड़ोसी देशों के लिए अब भी एक बड़ा खतरा बना हुआ है, जिन्हें व्यापार और यात्रा के गहरे संबंधों की वजह से 'हाई रिस्क' वाला इलाका माना जाता है।