फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

World Environment Day: बढ़ते जल-वायु प्रदूषण से कई तरह की बीमारियों का खतरा, जानिए कैसे रहें सुरक्षित?

Sun, 05 Jun 2022 12:16 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
विश्व पर्यावरण दिवस 2022 - फोटो : iStock
पिछले दो-तीन दशक के आंकड़ों पर नजर डालें को साफ हो जाता है कि कई कारणों से पर्यावरण को गंभीर रूप से क्षति पहुंची है। तेजी से बढ़ते रसायनों-कीटनाशकों के उपयोग ने न केवल हवा, बल्कि पानी और भोजन को भी दूषति कर दिया है। पर्यावरण संबंधी बढ़ती इन दिक्कतों ने हमारी सेहत को भी गंभीर रूप से क्षति पहुंचाई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो जल-वायु प्रदूषण के कारण पिछले एक दशक में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले काफी अधिक बढ़ गए हैं। इस तरह के प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिसके कारण लोगों में तंत्रिका विकारों के साथ कैंसर जैसे कई तरह की गंभीर रोगों के मामले काफी बढ़ गए हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण सीधे हमारे फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हुए कई तरह की गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। वहीं जल प्रदूषण के कारण हैजा, कालरा, हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आते रहे हैं। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर आइए जानते हैं कि बढ़ते प्रदूषण के साथ-साथ किन बीमारियों का खतरा सबसे अधिक हो गया है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है?
विज्ञापन

2 of 5
प्रदूषण के कारण बढ़ती समस्याएं - फोटो : istock
प्रदूषण के कारण बढ़ते मौत के मामले

द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि तमाम तरह के प्रदूषण के कारण साल 2019 में लगभग नौ मिलियन से अधिक (90 लाख) मौतें हुईं। यह दुनिया भर में होने वाले हर छह में से एक की मौत के बराबर है। भारत में भी स्थिति काफी चिंताजनक है। द लैंसेट की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में जहरीली हवा ने 1.67 मिलियन भारतीयों की जान ली, यह इस साल होने वाली कुल मौतों का 18 फीसदी है। 
विज्ञापन

3 of 5
पानी का प्रदूषण कई बीमारियो का बढ़ाता खतरा - फोटो : istock
जल प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियां

जल प्रदूषण, वैश्विक स्तर पर वर्षों से गंभीर खतरा बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व स्तर पर 2 बिलियन से अधिक लोग दूषित पेयजल स्रोत का उपयोग करने को मजबूर है। यह कई प्रकार की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। दूषित और खराब जल से हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस ए, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियों के संचरण का खतरा अधिक रहता है।

4 of 5
वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या - फोटो : Pixabay
वायु प्रदूषण और इससे होने वाली बीमारियां

डब्ल्यूएचओ का अनुमान है वायु प्रदूषण के कारण हर साल 4.2 मिलियन लोग समय से पहले मौत के शिकार हो जाते हैं। वायु प्रदूषण से होने वाली सबसे आम बीमारियों में इस्केमिक हृदय रोग, स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), फेफड़ों का कैंसर और बच्चों में अक्यूट लोअर रेस्पोरेटरी इंफेक्शन हैं। वायु प्रदूषण के कारण मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता - फोटो : iStock
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

बढ़ते वायु-जल और अन्य प्रदूषणों को लेकर द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के प्रमुख लेखर रिचर्ड फुलर कहते हैं, प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभावों का जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी यह काफी नुकसानदायक है। पर्यावरण को हो रहे नुकसान को कम करके इन खतरों से बचाव के उपाय करना बहुत आवश्यक है। भविष्य के लिए यह बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। जल-थल की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना और पेड़ लगाने से इस तरह के खतरे को कम किया जा सकता है।


----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें