पिछले दो-तीन दशक के आंकड़ों पर नजर डालें को साफ हो जाता है कि कई कारणों से पर्यावरण को गंभीर रूप से क्षति पहुंची है। तेजी से बढ़ते रसायनों-कीटनाशकों के उपयोग ने न केवल हवा, बल्कि पानी और भोजन को भी दूषति कर दिया है। पर्यावरण संबंधी बढ़ती इन दिक्कतों ने हमारी सेहत को भी गंभीर रूप से क्षति पहुंचाई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो जल-वायु प्रदूषण के कारण पिछले एक दशक में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले काफी अधिक बढ़ गए हैं। इस तरह के प्रदूषण का सीधा असर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिसके कारण लोगों में तंत्रिका विकारों के साथ कैंसर जैसे कई तरह की गंभीर रोगों के मामले काफी बढ़ गए हैं।
अध्ययनों से पता चलता है कि वायु प्रदूषण सीधे हमारे फेफड़ों और श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हुए कई तरह की गंभीर बीमारियों के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। वहीं जल प्रदूषण के कारण हैजा, कालरा, हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आते रहे हैं। 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर आइए जानते हैं कि बढ़ते प्रदूषण के साथ-साथ किन बीमारियों का खतरा सबसे अधिक हो गया है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है?