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World Diabetes Day 2025: डरा रहे हैं डायबिटीज के आंकड़े, भारत में हर दूसरे व्यक्ति का शुगर लेवल ठीक नहीं

Fri, 14 Nov 2025 08:47 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  •  Diabetes Day 2025: एक डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार भारत में टेस्ट किए गए हर दो में से एक व्यक्ति में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ या फिर अनियमित पाया गया है।
  • ये रिपोर्ट संकेत देती है कि देश भर में डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
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भारत में डायबिटीज के डराने वाले आंकड़े - फोटो : Adobe stock
दुनियाभर में पिछले एक दशक में जिन बीमारियों के मामले सबसे तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं, डायबिटीज उनमें से एक है। हाई ब्लड शुगर की ये बीमारी शरीर के कई अंगों जैसे किडनी, आंख, हृदय, तंत्रिकाओं और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। भारत में डायबिटीज के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे 'डायबिटीज कैपिटल' भी कहा जाने लगा है।

डायबिटीज के बढ़ते जोखिमों के बारे में लोगों को अलर्ट करने और और इससे बचाव के तरीकों को लेकर शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस से पहले, भारत में इस बीमारी को लेकर जो रिपोर्ट सामने आ रही है वो काफी डराने वाली है।

एक डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म की रिपोर्ट के अनुसार भारत में टेस्ट किए गए हर दो में से एक व्यक्ति में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ या फिर अनियमित पाया गया है। ये रिपोर्ट संकेत देती है कि देशभर में डायबिटीज और प्रीडायबिटीज के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।
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डायबिटीज के बढ़ते मरीज - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज के आंकड़े बढ़ा रहे हैं चिंता

जनवरी 2021 से सितंबर 2025 के बीच 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 40 लाख नैदानिक रिपोर्ट और दवाओं के 1.9 करोड़ ऑर्डर के रिकॉर्ड के आधार पर ये रिपोर्ट तैयार की गई है। 'डायबिटीज-द साइलेंट किलर स्विपिंग एक्रॉस इंडिया' नाम से प्रकाशित इस रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने भारत में बढ़ती इस गंभीर बीमारी को लेकर अलर्ट किया गया है। 

विश्लेषण से पता चलता है कि हर तीन में से एक शुगर टेस्ट (HbA1c परीक्षण) के परिणाम मधुमेह की श्रेणी में आते हैं, जबकि चार में से एक व्यक्ति में प्रीडायबिटीज के लक्षण देखे गए हैं। कुल मिलाकर, ये संकेत देते हैं कि परीक्षण किए गए आधे से अधिक लोगों में ब्लड शुगर का स्तर अनियमित था। 
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
युवाओं में बढ़ता मधुमेह का खतरा

डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म के एक अधिकारी ने बताया कि ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक अलर्ट है जो कहता है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए व्यापक प्रयास करने की आवश्यकता है। चिंता की बात ये भी है कि लाखों लोग इस बात से अनजान हैं कि उनमें डायबिटीज का खतरा हो सकता है।

डायबिटीज एक साइलेंट महामारी के रूप में बढ़ रही है, जिसे कंट्रोल करने के लिए जागरूकता, समय पर निदान और रोकथाम के उपायों को लेकर लोगों को अलर्ट करने की जरूरत है। 

आंकड़े ये भी दर्शाते हैं कि मधुमेह अब केवल वृद्धों तक ही सीमित नहीं है। 30 वर्ष से कम आयु के लोगों में भी हाई ब्लड शुगर की समस्या देखी जा रही है। 60 की उम्र के बाद ये बीमारी और खतरनाक हो सकती है, जहां दस में से आठ व्यक्तियों को मधुमेह या प्री डायबिटीज की रीडिंग दिखाई देती है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ते डायबिटीज के मामलों के कारण हृदय रोग, किडनी की समस्याएं और आंखों की रोशनी कम होने जैसी जटिलताएं भी पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बढ़ सकती हैं।
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डायबिटीज के आंकड़े चिंताजनक - फोटो : Freepik.com
किन राज्यों में खतरा अधिक

अध्ययन में लैंगिक अंतर का भी उल्लेख किया गया है, परीक्षण किए गए 51.9 प्रतिशत पुरुषों और 45.43 प्रतिशत महिलाओं में ब्लड शुगर सामान्य से अधिक पाया गया। पुरुषों में मधुमेह जल्दी विकसित होता है, जबकि महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद इसमें तेजी से वृद्धि देखी जाती है। क्षेत्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश (41 प्रतिशत) की तुलना में पुडुचेरी (63 प्रतिशत), ओडिशा (61 प्रतिशत), तमिलनाडु (56 प्रतिशत) और गोवा (54 प्रतिशत) में ब्लड शुगर हाई वाले लोगों के आंकड़े अधिक देखे गए हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज को लेकर सबसे चिंताजनक प्रवृत्तियों में इसकी बदलती आयु प्रोफाइल है। इस बीमारी के खतरे को देखते हुए कम उम्र से ही स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम और स्ट्रेस कंट्रोल जैसे उपाय  शुरू किए जाने चाहिए। ये आदतें मधुमेह और इसके दीर्घकालिक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकती हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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