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World Diabetes Day 2024: डायबिटीज रोगियों को इन बीमारियों का भी रहता है खतरा, एक बीमारी से तो जा सकती है जान

Thu, 14 Nov 2024 12:01 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दुनियाभर में 53 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।
  • डायबिटीज के कारण कई अन्य अंगों पर भी गंभीर असर हो सकता है।
  • बढ़े हुए शुगर के कारण  हृदय, आंखों, किडनी और रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं।
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डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
World Diabetes Day 2024: मधुमेह या डायबिटीज एक गंभीर और क्रोनिक बीमारी है, जिसका जोखिम दुनियाभार में तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में 80 करोड़ से अधिक लोग इस बीमारी के शिकार हैं। भले ही डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज टाइप-2 वाले हों, पर ये कई प्रकार की हो सकती है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक किसी भी उम्र का व्यक्ति इस रोग से पीड़ित हो सकता है, इसलिए सभी लोगों को डायबिटीज के बारे में सही जानकारी होना और इससे बचाव के लिए प्रयास करते रहना जरूरी है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती इस गंभीर और क्रोनिक बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करने, इससे बचाव को लेकर लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day) मनाया जाता है। 

डॉक्टर कहते हैं, यदि आपको डायबिटीज है तो सिर्फ आपको यही बीमारी नहीं है, डायबिटीज के कारण कई अन्य अंगों पर भी गंभीर असर हो सकता है और भविष्य में खतरनाक बीमारियों के उत्पन्न होने का जोखिम रहता है। इसलिए जरूरी है कि शुगर के स्तर को नियंत्रित रखा जाए।
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हाई ब्लड शुगर की समस्या - फोटो : Freepik.com
कैसे प्रभावित करती है मधुमेह की समस्या?

जिन लोगों को मधुमेह है उनका ब्लड शुगर अक्सर सामान्य से अधिक बना रह सकता है। हम जो भोजन करते हैं उससे ग्लूकोज मिलता है जिससे शरीर को काम करने की उर्जा मिलती है। इंसुलिन नामक एक हार्मोन ग्लूकोज को आपकी कोशिकाओं में जाने में मदद करता है। टाइप-1 डायबिटीज में आपका शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता है वहीं टाइप-2 डायबिटीज में आपका शरीर या तो इंसुलिन नहीं बनाता या इसका सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता है। पर्याप्त इंसुलिन के बिना, ग्लूकोज आपके रक्त में बढ़ने लगता है।

समय के साथ बढ़े हुए शुगर के कारण  हृदय, आंखों, किडनी और रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंच सकती है।
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आंखों से संबंधित दिक्कतें - फोटो : freepik.com
कम हो सकती है आंखों की रोशनी

बढ़े हुए शुगर लेवल के कारण डायबिटीज रोगियों को आंखों से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आंखों में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसे डायबिटिक रेटेनोपैथी के रूप में जाना जाता है। रेटिना में रक्त वाहिकाओं को पहुंचने वाले नुकसान के कारण दृष्टि हानि या अंधापन हो सकता है। मधुमेह वाले लोगों में यह सबसे आम नेत्र रोग है।

शुगर के कारण आंख के लेंस में धुंध जैसा निर्माण हो सकता है जिससे आपको स्पष्ट देखने में दिक्कत होने लगती है। मधुमेह रोगियों में मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। 

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किडनी से संबंधित समस्याएं - फोटो : Adobe stock
किडनी फेलियर का जोखिम

आंखों के अलावा डायबिटीज के शिकार लोगों में किडनी की बीमारी होने का खतरा भी अधिक होता है। किडनी में रक्त वाहिकाओं को होने वाली क्षति के कारण समय के साथ किडनी ठीक तरीके से काम करना बंद कर देती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों में उच्च रक्तचाप का भी खतरा अधिक होता है, जिसका भी किडनी की सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।

डायबिटीज के कारण मूत्र में कीटोन्स का स्तर असामान्य हो जाता है। इसकी मात्रा बढ़े रहने के कारण किडनी फेलियर होने का खतरा काफी बढ़ सकता है।
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
जानलेवा हो सकती हैं हृदय की बीमारियां

डायबिटीज के शिकार लोगों में समय के साथ हृदय रोगों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है, जिसे वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। 

हाई ब्लड शुगर के कारण हृदय में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा इनमें वसा जमा होने की आशंका भी बढ़ जाती है। यह हृदय से रक्त ले जाने वाली वाहिकाओं को अवरुद्ध और क्षतिग्रस्त कर सकती है जिससे हार्ट अटैक होने का जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि डायबिटीज रोगियों को अपने शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह दी जाती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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